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आर्मी मैन पर बनी बेहतरीन फिल्म है सैटेलाइट शंकर, सूरज पंचोली की शानदार वापसी

Nov. 8, 2019, 6:44 p.m.

फिल्म - सैटेलाइट शंकर

कलाकार - सूरज पंचोली, मेघा आकाश, पालोमी घोष 

डायरेक्टर - इरफान कमल 

समीक्षा - नीतू कुमार 

रेटिंग्स  - 3 स्टार  

 

करीब चार साल बाद सूरज पंचोली की की फिल्मी पर्दे पर वापसी हुई है। जिया खान सुसाइड केस में वो आरोपी हैं और इसका असर शायद उनके फिल्मी करियर पर पड़ रहा है। सैटेलाइट शंकर से सूरज की दमदार वापसी हुई है। ये एक अलग तरह की फिल्म है। इस फिल्म को इसके प्रोड्यूसर्स ने भी कम आंका। यहीं वजह है कि उन्होंने फिल्म के प्रमोशन भी पैसा नहीं लगाया। इस फिल्म से कोई खास उम्मीद नहीं थी लेकिन ये  कहीं बेहतर निकली और इससे  फिल्म देखने का मजा दोगुना हो गया। डायरेक्टर इरफान कमल ने  'सैटेलाइट शंकर' बहुत अच्छे नीयत से बनाई है और ये फिल्म देश भक्ति से जज्बे से भरपूर है। 

कहानी - इंडियन आर्मी का सैनिक  शंकर (सूरज पंचोली) सैटेलाइट के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उसके पास बचपन में उसके पिता का दिया हुआ एक डिवाइस है, जिससे वह तरह-तरह की मिमिक्री करता है। कई भाषाओं का जानकार शंकर अलग-अलग तरह की आवाजें भी निकालता है। शंकर अपने सीनियर से 8 दिन की छुट्टी लेकर मां से मिलने घर के लिए निकलता है। एक बंगाली बुजुर्ग दंपती को ट्रेन में बैठाने के चक्कर में उसकी अपनी ट्रेन छूट जाती है। आगे चलकर उसकी मुलाकात एक विडियो ब्लॉगर से होती है, जिसे साथ मिलकर वह टैक्सी माफिया का पर्दाफाश करता है। अपने आगे के सफर में वह दुर्घटनाग्रस्त बस में फंसे लोगों को मौत के मुंह से बचाता है। वह अपने दोस्त की आवाज में बातें करके उसकी कोमा में जा चुकी मां को होश में लाता है, तो टेंपो ड्राइवर को गुंडों से बचाता है। इस दरम्यां वह अलग-अलग लोगों से मिलता है और किस तरह वह अपनी भावनाओं से एक इंसान के रूप में उसके नजरिए से चीजों को बदलता है। समाज सेवा के चक्कर में शंकर के 8 दिन निकल जाते हैं। बटालियन  में रिपोर्ट करने के सिर्फ दो दिन बचे हैं और मां से भी मिलना है। इसी दौरान वो  नर्स प्रमिला (मेघा आकाश) मिलता है । मेघा कैसे उसे मां से मिलने में मदद करती है ? क्या शंकर अपने वादे के मुताबिक तय दिन पर बटालियन लौट पाता है ये जानने के लिए आपको ये फिल्म देखनी चाहिए। 

हमारी राय  - सैटेलाइट शंकर के रोल में सूरज पंचोली शानदार हैं। डायरेक्टर इरफान कमल ने भी फिल्म पक पकड़ बनाए रखी है। कहानी पर सही तरीके से काम किया गया होता तो ये और बेहतरीन फिल्म हो सकती थी। वैसे आर्मी और उसके जवानों पर बनी यह फिल्म इंडिया-पाकिस्तान जैसे घिसे-पिटे मुद्दे से दूर एक यूनीक कॉन्सेप्ट पर बनाई गई है। यह ऐसी फिल्म है, जिसे आप सपरिवार देख सकते हैं, खास तौर पर अपने बच्चों को यह फिल्म दिखा सकते हैं