फिल्मी पर्दे पर विलेन बनकर छाया था ये एक्टर, हीरो के साथ एक्शन नहीं बल्कि साजिश करता था !

By Aditi June 10, 2021, 8:33 p.m. 1k

अदिति यादव- बॉलीवुड इंडस्ट्री का एक वो भी दौर था जब फिल्में विलेन की वजह से चलती थीं। उस दौर में  हीरो जितना सीधा साधा होता था विलेन उतना ही धुर्त।  देखा जाए तो जिन फिल्मों में विलेन का रोल दमदार रहा है वो ज्यादा हिट हुई हैं। प्राण, अमरीश पुरी, अमजद खान, कादर खान, शक्ति कपूर, गुलशन ग्रोवर और शक्ति कपूर जैसे सुपर स्टार विलेन फिल्म इंडस्ट्री में रहे हैं। वहीं इस लिस्ट में जीवन का भी नाम आता है। कई फिल्मों को खलनायक बनकर इन्होंने जीवन दिया ।

 इन्हीं में से एक थे बॉलीवुड फिल्मों के विलेन एक्टर जीवन (actor jeevan)। कहा जाता है कि जीवन 70 और 80 के दशक एकलौते विलेन थे जो हर फिल्म में जान फूंक देते थे। जीवन हीरो से हाथापाई नहीं करते थे। ऐसी साजिश रचते थे कि हीरो उनके सामने चारो खाने चित हो जाता था। एक दो बार नहीं बल्कि बार बार  हीरो और उसके परिवार को परेशान करते थे। 

 

 एक्टर के करीब 4 दशक तक इंडियन सिनेमा में काम काम किया था। सैकड़ों फिल्में की।  10 जून 1987 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा था। एक्टर का निधन मुंबई में हुआ था। जीवन का असली नाम ओंकार नाथ धर था। 24 भाई बहनों में इनका बचपन बीता था। 

कम ही लोग जानते हैं कि वे महज 18 साल की उम्र में अपनी जेब में 26 रुपए लेकर घर से भागकर मुंबई आ गए थे। जीवन को बचपन से एक्टिंग करने का जोश था। वे ऐसी फैमिली से थे जहां एक्टिंग करने के लिए उन्हें इजाजत नहीं थी। इसलिए वे घर से भागकर मुंबई आ गए। करियर के शुरुआती दिनों में उनको काफी स्ट्रगल करना पड़ा।

मुंबई आकर उन्होंने नौकरी की तलाश की और उनको मोहन सिन्हा के स्टूडियो में रिफ्लेक्टर पर सिल्वर पेपर चिपकाने का काम मिला। मोहन लाल उस समय के फेमस डायरेक्टर थे। जब उनको पता चला कि जीवन एक्टिंग करना चाहते हैं तो उन्होंने अपनी फिल्म फैशनेबल इंडिया में उन्हें रोल दिया। 

जीवन की किस्मत चमकी और उनको एक के बाद एक कई फिल्मों में काम किया।  50 के दशक में बनी हर धार्मिक फिल्म में उन्होंने नारद का रोल किया।  बता दें उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की करीब 60 फिल्मों में नारद मुनि का किरदार निभाया। 

कहा जाता है कि जब जीवन फिल्मों में नादर मुनि का रोल करते थे तो वे नॉनवेज खाना छोड़ देते थे। उनके डायलॉग ने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दी। साल 1942 में स्टेशन मास्टर और 1946 में अफसाना जैसे फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने नागिन, शबनम, हीर-रांझा, जॉनी मेरा नाम, कानून, सुरक्षा, दो फूल, फूल और पत्थर, वक्त, हमराज, रोटी, धर्मात्मा, धरमवीर, गोपी किशन, सुहाग, नसीब, लावारिस, याराना, तीसरी आंख, देश प्रेमी, हथकड़ी, गिरफ्तार जैसी कई फिल्मों में काम किया। 

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