83 Film Review: फिल्म में रणवीर सिंह कहां हैं, ढूंढते रह जाएंगे, पर्दे पर जीवांत हुआ किक्रेट

E24

फिल्म: 83

कलाकार: रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण, पंकज त्रिपाठी, साकिब सलीम 

डायरेक्टर: कबीर खान  

स्टार: 4

अश्वनी कुमार- क्रिकेट कोई खेल नहीं, भारत में एक त्यौहार है। हर घर में मनाया जाने वाला त्यौहार, जहां भारत की हर जीत के साथ पटाखे फोड़े जाते हैं, लड्डू बंटते हैं, जाति-धर्म का भेद मिटाकर गले मिला जाता है। लेकिन ये सब शुरू कहां से हुआ ? जिस खेल के बारे में भारत का क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ही संजीदा नहीं था, उस खेल ने पूरे देश को जीत का सपना देखना कैसे सिखाया ? 83 फिल्म नहीं, एक दस्तावेज है उस सबसे शानदार इतिहास की, जिसने इस पूरे मुल्क को ‘इंडिया-इंडिया’ के नारे में पिरो दिया।

सबसे मुश्किल था कि 38 साल पुराने इतिहास को परत दर परत समेटना। ऑडियंस के सामने वो कहानी रखना, जो उन्होने सुनी ना हो। क्योंकि 83 के वर्ल्ड कप के बारे में इन 38 साल में बहुत सारी बातें हुई हैं, बहुत सारी डॉक्यूमेंट्रीज़ बनी हैं, बहुत सारी किताबें लिखी गई हैं, तो कुछ नया बताना आसान नहीं था। लेकिन कबीर ख़ान के साथ मिलकर संजय पूरन सिंह चौहान और वासन बाला ने कुरेद-कुरेद कर वो लम्हे निकाले हैं कि थियेटर में बैठकर आप हसंगे, रोएंगे और तालियां बजाएंगे। 83 के वर्ल्ड कप की कहानी का ये सबसे खूबसूरत अहसास है। 

कहानी  

83 की कहानी शुरू होती है, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को 1983 में मिले क्रिकेट वर्ल्ड कप के इन्वीटेशन से। कबीर ख़ान ने दिखाया है कि कैसे क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों से लेकर क्रिकेट टीम के प्लेयर्स तक इस वर्ल्ड कप के इन्वीटेशन पर हंसते हैं। वो इसे अमेरिका ट्रिप का एक बहाना मानते हैं। कपिल पर किसी को भरोसा नहीं है और टीम की जीत की उम्मीद तो बेमानी है। आलम ये है कि वर्ल्ड कप सेमीफाइनल से पहले ही इंडियन क्रिकेट टीम की घर वापसी की टिकट तक बुक कर दी जाती है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान कपिल देव जब दुनिया भर के प्रेस के सामने वर्ल्ड कप जीतने का दावा करता है, तो सब उसका मज़ाक उड़ाते हैं। लेकिन एक शख़्स के हौसले और फिर पूरी टीम के उसके पीछे खड़े होने की कहानी है 83।

डायरेक्शन

मैच के दौरान क्या हुआ आप सब जानते हैं। लेकिन मैच के पीछे क्या हुआ, घरों में क्या हुआ, क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में क्या हुआ, भारत की राजनीति में क्या हुआ ? कबीर ख़ान की फिल्म 83, इन सारे सवालों का जवाब है। हर मैच को, स्टेडियम के बाहर और स्टेडियम के अंदर के जज़्बातों को, हर बॉल की रफ्तार को, बैट की घूमती सरसराहट को कबीर ख़ान ने इस फिल्म में सजा दिया है और साथ ही बेहद खूबी से 83 की वो दुनिया बसाई है, जिसके बारे में लोग ने सिर्फ़ अंदाज़ा ही लगाया है। सबसे कमाल खूबी है कि असली मैच के वीडियो और तस्वीरों को कबीर ख़ान ने फिल्म में ऐसे जगह दी है कि आपके लिए अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाएगा कि क्या असली है और क्या फिल्मी है !

2 घंटे 42 की मिनट की फिल्म में फर्स्ट हॉफ़ आपको स्लो लग सकता है, लेकिन याद रखिए वर्ल्ड कप सेमिफाइनल तक पहुचंने से पहले इंडियन क्रिकेट टीम के लिए दुनिया भी इससे भी ज़्यादा स्लो थी और फिर प्रैक्टिस सेशन में आपको भले ही थ्रिल कम नज़र आए, लेकिन असली मैच में परफॉरमेंस की बुनियाद तो वहीं होती है। इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी ये है कि आपको अहसास ही नहीं होता कि आप फिल्म देख रहे हैं, लगता है कि स्टेडियम में बैठकर आप भारतीय क्रिकेट टीम को इतिहास बनाते हुए देख रहे हैं।

कलाकार

परफॉरमेंस पर आइए, तो कपिल देव के किरदार को रणवीर सिंह ने ऐसा जिया है कि चंद मिनटों के बद आप भूल जाएंगे कि आप स्क्रीन पर रणवीर सिंह को देखकर रहे हैं। बिल्कुल कपिल देव जैसा दिखना, बोलना, चलना, दोनों हाथ हवा में उठाकर बॉलिंग करना और बैट घुमाकर छक्के लगाना। रणवीर सिंह की ये परफॉरमेंस, उनके करियर की बेस्ट परफॉरमेंस है। वो एक सेकेंड के लिए भी अपने किरदार के बाहर नहीं गए हैं। कपिल देव की पत्नी रोमी भाटिया के किरदार में दीपिका पादुकोण का उतना भी छोटा नहीं है, जो अफ़वाहें आपने सोशल मीडिया पर सुनी थी। अच्छा ख़ासा रोल है और दीपिका ने इसे पूरी शिद्दत के साथ किया है। 83 में भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर पी.आर. मान सिंह के किरदार में पंकज त्रिपाठी को देखना ऐसा अहसास है कि लगता है कि इंडियन फिल्म इंडस्ट्री को मिला ये सबसे नायाब तोहफ़ा है और कबीर ख़ान की 83 की टीम के क्या कहने, हर किरदार जानदार।

आप भूल जाएंगे कि आप अमरनाथ के किरदार में साकिब सलीम, श्रीकांत के किरदार में जिवा, यशपाल शर्मा के किरदार में जतिन शर्मा, संदीप पाटिल के किरदार में चिराग पाटिल, कीर्ति आज़ाद के किरदार में दिनकर शर्मा, रोज़र बिन्नी के किरदार में निशांत दहिया, मदन लाल के किरदार में हार्डी संधु, दिलीप वेंगशेखर के किरदार में आदित्य कोठारे, सुनील वाल्सन के किरदार में आर. बद्री, रवि शास्त्री के किरदार में धैर्य कर्वा, फारूख़ इंजीनियर के किरदार में बोमान इरानी ने समां बांध दिया और दो नाम ख़ास तौर पर मेशन किए जाने चाहिए, सईद किरमानी बने साहिल खट्टर और बलविंदर संधु बने एमी विर्क ने जो काम किया है, उसके लिए तारीफ़ें और तालियां दोनो मिलनी चाहिए।

क्यों देखें?

ये फिल्म इतिहास को दोबारा से जीने के लिए देखना ज़रूरी है ताकि पता चल सके सौरव गांगुली, धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा जिस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उसकी बुनियाद कहां रखी गई।

first published:Dec. 21, 2021, 2:13 p.m.

विज्ञापन

टीवी से लेकर हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़ी मनोरंजन की सभी ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें E24 से - फॉलो करें E24 को फेसबुक , इंस्टाग्राम , गूगल न्यूज़ .