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Sanak Review: ‘सनक’ की कहानी खिसक गई, विद्युत का एक्शन भी नहीं बचा पाया

E24

फिल्म - सनक

कलाकार - विद्युत जामवाल, चंदन रॉय सान्याल, नेहा धूपिया और रुकमणि मैत्रा

डायरेक्टर - कनिष्क वर्मा

स्टार -  2

अश्विनी कुमार- दशहरे पर छुट्टियों को भुनाने के लिए ओटीटी पर इस बार फिल्मों की बहार है। एक ओर रश्मी रॉकेट, तो दूसरी ओर विक्की कौशल की उधम सिंह। फिर डिज़िनी हॉटस्टार भी विद्युत जामवाल की ‘सनक’ के साथ दशहरे के इस मौके को भुनाने का मौका नहीं छोड़ना चाहता था। लेकिन फिल्मों की इस कतार में, क्या विद्युत जामवाल की ‘सनक’ में वो दम है, जो आपको इसकी ओर खींच ले, तो जवाब है – नहीं।

 

दरअसल विद्युत जामवाल को फिल्म में लेने के बाद प्रोड्यूसर और डायरेक्टर का पूरा ध्यान इस पर होता है कि वो उनसे कितना अच्छा एक्शन करवा लें। तो इस बार ‘सनक’ में भी यही हुआ है, एक्शन के चक्कर में स्टोरी, घनचक्कर हो गई है। 

हॉस्पिटल के बैकड्राम में बेस्ड होस्टेज ड्रामा ‘सनक’ कहानी है विवान और उसकी बीवी रूक्मिणी की। रुक्मिणी को एक ऐसी बीमारी है, जिससे उसका दिल धीरे-धीरे काम करना बंद कर रहा है। विवान उसे बचाना चाहता है और हॉस्पिटल में ऑपरेशन भी सक्सेसफुल हो जाता है। लेकिन कहानी यहीं से शुरु होती है। 

जब विवान रुक्मिणी को हॉस्पिटल से डिस्चॉर्ज करवाने जाता है, तो वहां टेरेरिस्ट का एक ग्रुप, जिसकी अगुवाई संजू सोलंकी कर रहा है, हॉस्पिटल के अंदर कब्ज़ा कर लेता है। एक आर्म्स डीलर अजय पाल सिंह को वहां से निकालने के लिए खून खराबा शुरु कर देता है। हॉस्पिटल के अंदर विवान के तौर पर विद्युत जामवाल है, जो अपनी बीवी को बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। बाहर पुलिस है, जो कुछ कर नहीं पा रही है। तो एक्शन होगा... वही हो रहा है। 

अब ये कहानी इतनी प्रेडिक्टेबल है कि आप खुद से पूछेंगे कि ये क्या है ? ‘सनक’ की सबसे बड़ी कमज़ोरी इसका स्क्रीन प्ले और डायलॉग है। आप समझ नहीं पाते कि हॉस्पिटल को कब्ज़े में लेने वाले टेरेरिस्ट में उनकी लीडर और एक साथी को छोड़कर, सबके सब इंटरनेशनल फाइटर कैसे हैं ? अमेरिकन अफ्रीकन टेरेरिस्ट का ये कॉन्सेप्ट समझ में नहीं आता। और ये सारे इंटरनेशल टेरेरिस्ट, मार्शल ऑर्ट्स के एक्सपर्ट हैं। 

दरअसल विद्युत जामवाल के साथ फाइट सेक्वेंस को अच्छा बनाने के लिए मार्शल ऑर्टिस्ट का आईडिया तो अच्छा है, लेकिन तब ये कहानी मुंबई की ना होकर इंग्लैंड या किसी दूसरे युरोपियन देश की होती तो बेहतर होता। चलिए इसे छोड़ भी देते हैं, तो आगे ये पल्ले नहीं पड़ता कि फिल्म में पुलिस क्या कर रही है। मतलब पुलिस ऑफिसर नेहा धूपिया को कास्ट क्यों किया गया है ? क्या इसलिए कि वो हॉस्पिटल के बाहर खड़ी रहकर बम डिफ्यूज़ करवाए और एक सिविलियन को अंदर टेरेरिस्ट को इलीमिनेट करने का काम दे दें ?

कहानी में इतने छेद है, कि रफू करने से भी काम नहीं चलता। वो भी तब, जब अभी हाल में ही ओटीटी पर बेहतरीन होस्टेज ड्रामा ‘मुंबई डायरीज़ 26/11’ ने कामयाबी की नई कहानी लिखी हो। खैर, फिल्म को बचाता है विद्युत जामवाल का बेहतरीन एक्शन। इसमें कोई दो राय नहीं, कि विद्युत से शानदार एक्शन स्टार इस वक्त कम से कम बॉलीवुड में तो नहीं है। MRI मशीन के साथ विद्युत का फाइट सेक्वेंस और फिज़ियो थेरपी रूम का एक्शन सीक्वेंस सनक का हाईलाइट है। बाकियों की परफॉरमेंस और डायरेक्शन के बारे में बात ना ही करें, तो बेहतर है। 

सनक को दो स्टार ।

first published:Oct. 15, 2021, 1:51 p.m.

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