बॉब बिस्वास रिव्यू : जूनियर बच्चन दमदार, कहानी कमज़ोर

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अश्विनी कुमार-दिल्ली:

स्पिन ऑफ़ जानते हैं ?  वही जो नीरज पांडे ने फिल्म बेबी के कैरेक्टर शबाना के साथ किया था, जिसमें तापसी का एक छोटा सा रोल था और बाद में उस रोल पर एक फिल्म बनी। अभी नीरज पांडे ने यही ट्रिक स्पेशल ऑप्स के हिम्मत सिंह के साथ भी अपनाई।2012 में डायरेक्टर सुजॉय घोष ने कहानी बनाई थी, उसमें एक कैरेक्टर था - बॉब बिस्वास। ये बॉब सामने से तो एक बीमा एजेंट था, लेकिन असल में वो एक शॉर्प शूटर था। जब भी वो एकमिनट बोलता था, थियेटर में बैठे लोग दिल थाम लेते थे। चेहरे पर बगैर किसी एक्सप्रेशन के वो बीमा एजेंट, रिवॉल्वर निकालता और सामने वाले के माथे के बीचो-बीच गोली मार देता। ऐसासटीक निशाना कि बचने की कोई गुंजाइश नहीं। ये छोटा कैरेक्टर, लोगों के ज़ेहन में छप गया और सुजॉय घोष के ज़ेहन में बॉब बिस्वास की कहानी चलती गई। ऐसे में जब सुजॉय घोष की बेटी दीया ने डायरेक्टर बनने की ठानी, तो पापा सुजॉय घोष ने बॉब बिस्वास की पीछे की कहानी को एक नया आयाम दिया है।

अभिषेक बच्चन इस बार बॉब बिस्वास बने हैं, जिसे ओरिजिनल फिल्म में शाश्वत चटर्जी ने प्ले किया था। इस किरदार के लिए अभिषेक ने अपना पूरा लुक बदला, वज़न बढ़ाया, चश्मा पहने वैसे ही बैग लिए, वैसी ही चाल-ढाल लिए अभिषेक ने बॉब बनने की पूरी कोशिश की। उनकी कोशिश कामयाब रही या नहीं, ये आगे बताएंगे। पहले आते हैं कहानी पर।

ये कहानी शुरु होती है हॉस्पिटल से, जहां बॉब को पूरे 8 साल के बाद होश आया है। वो कोमा में था। उसे घर जाने के लिए उसकी बीवी मैरी और बेटा हॉस्पिटल आए हैं। मगर कहानी पहले ही मोड़ से टर्न लेती है, बॉब को होश तो आ गया है... लेकिन उसकी यादें खो गई हैं।डॉक्टर का सजेशन है कि जैसे-जैसे बॉब अपनी ज़िंदगी मे लौटेगा, उसकी यादें भी वापस आती जाएंगी। उसके घर वाले भी एक नई शुरुआत करना चाहते हैं। बॉब चाहता है कि वो अपनों को पहचान सके, अपने बारे में जान सके। लेकिन कुछ लोग और भी हैं, जो बॉब की याद्दाश्त वापस आने का इंतज़ार कर रहे हैं। स्पेशल क्राइम ब्रांच के ऑफिसर्स बॉब से मिलते हैं और बताते हैं कि वो उनके लिए मर्डर किया करता था और आगे भी उसे यही करना होगा। लेकिन फिर कहानी ड्रग्स माफ़ियाओं के बीच चली जाती है।

बॉब बदलना चाहता है, अपने गुनाहों की माफ़ी चाहता है लेकिन ये रास्ता आसान नहीं है।सुजॉय घोष ने कोशिश बहुत की है कि बॉब बिस्वास की ज़िंदगी के सारे अनसुलझे राज़ खुलें। वो कोमा में क्यों था ? उसने मर्डर क्यों किए ? वो ऐसा क्यों बना ? मगर सच ये है कि कहानी हीबॉब बिस्वास की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई।ड्रग नेटवर्क की कहानी और बॉब की निज़ी कहानी फिल्म में पैरेलल चलती है, लेकिन इंट्रेस्ट पैदा नहीं करती। फिल्म की सबसे बड़ी ख़ामी ये है कि देखने वाले को अंदाज़ा होता चला जाता है,कि आगे क्या होगा... बस बॉब की कहानी दिलचस्पी खोती जाती है।हांलाकि परफॉरमेंस पर आएं, तो अभिषेक बच्चन ने बॉब बिस्वास को नई पहचान दी है। शाश्वत चैटर्जी के आगे की नहीं, बल्कि एक पैरेलल लाइन खींची है। मगर मुश्किल ये है कि जब जूनियरबच्चन को कोई परफॉरमेंस ओरिएंटेड रोल मिलता है, तो कहानी पटरी से उतर जाती है।

चित्रांगदा फिल्म में बेहद खूबसूरत लगी हैं और उनकी परफॉरमेंस भी बहुत शानदार है। लेकिन, अगर, मगर यहां भी लगा है और वो ये कि चित्रांगदा के कैरेक्टर को स्क्रीनप्ले में कोई डायमेंशन दिया ही नहीं गया। काली दा बने परम बंदोपाध्याय का काम भी अच्छा और याद रखे जाने वाला है। पुलिस इंस्पेक्टर के रोल में टीना देसाई ने भी असर छोड़ा है। दीया अन्नपूर्णा घोष ने अपने डेब्यू फिल्म से असर तो छोड़ा है, अगर कहानी उनका पूरा साथ देती... तो ये असर और गहरा होता।बॉब बिस्वास को देखा जा सकता है, अभिषेक की परफॉरमेंस के लिए।फिल्म को 3 स्टार।

first published:Dec. 3, 2021, 6:02 p.m.

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