Atrangi Re Film Review: अक्षय, सारा औऱ धनुष को आनंद एल राय का सबसे बड़ा ज़ीरो !

E24

फिल्म: अतरंगी रे

निर्देशक:आनंद एल राय 

कलाकार:अक्षय कुमार, सारा अली ख़ान, धनुष

रेटिंग: 2 स्टार

आनंद एल राय ने देश में कोरोना की शुरुआत के पहले अतरंगी रे का ऐलान किया था। फिल्म की शूटिंग शुरु हुई, तो लॉकडाउन लग गया। महीनों तक फिल्म रूकी रही फिर कोविड प्रोटोकॉल के बीच शूटिंग शुरु हुई, तो आनंद एल राय ने अपनी फिल्म में ये डायलॉग रख दिया कि ‘कोविड का भाई डेविड तेजी से फैल रहा है, दवा लेनी ज़रूरी है’। ये डायलॉग जितना अटपटा है, अतरंगी रे उससे भी ज़्यादा अटपटी है। सीधा-सीधा कहें तो आनंद एल राय ने अपनी पुरानी फिल्म ज़ीरो से भी बड़ा ज़ीरो बना दिया है- अतरंगी रे।

कहानी 

आनंद एल राय ने अतरंगी के ओपनिंग क्रेडिट्स में पहली बार एक्सपेरीमेट किया है कि उन्होने फिल्म के क्रेडिट्स में अपने सारे साथियों की जगह दी है। अपने साथ तनु वेड्स मनु और रांझणा से जुड़े राइटर – हिमांशु शर्मा को भी। हिमांशु ने आनंद एल रॉय की तकरीबन हर फिल्म लिखी है। ज़ीरो भी। अतरंगी रे में हिमांशु ने राय साहब को एक अच्छी कहानी तो दी, लेकिन स्क्रीनप्ले के तौर पर रायता पकड़ा दिया, जिसे डायरेक्टर साहब समेट नहीं पाए हैं।

कहानी शुरु होती है, ट्रेलर की तरह कि रिंकू भाग रही हैं, घर वाले पकड़ रहे हैं। रिंकू के आशिक का पता ही नहीं चल पा रहा है। घर वाले पीछा छुड़ाने के लिए बिहार के बाहर का लड़का पकड़ते हैं... उसे लॉफिंग गैस सुंघाते हैं और शादी में बिठा देते हैं। अब चेन्नई के विशु बाबू, जो दिल्ली से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं और अपने ही डीन की बेटी से सगाई करने वाले हैं रिंकू के चक्कर में फंस जाते हैं। चकाचक रिंकू के चक्कर में शादी टूटती है और फिर रिंकू का चैप्टर शुरु हो जाता है। लेकिन रिंकू का जो आशिक है सज्जाद अली ख़ान, वो मिस्ट्री है। जादू के खेल दिखाता है, जादू सा आता है और जाता है। 

रिंकू की परेशानी ये है कि वो विशु और सज्जाद दोनो को चाहती हैं, लेकिन ये तो सिर्फ़ दिखावा है। असल परेशानी कुछ और है, जिसके चक्कर में विशु का दिमाग़ घूम जाता है। रिंकू के प्यार में पड़कर वो जो पापड़ बेलते हैं, उसका स्वाद करारा नहीं आ पाया है। एक तरीके से समझाएं, तो क्लाइमेक्स में विशु बाबू रेलवे स्टेशन पर लोगों को मिठाई बांट रहे हैं कि मेरी बीवी वापस आ गई, लेकिन वो जिसे मिठाई बांट रहे हैं, वो सब दिख ही नहीं रहे हैं। विशु के पीछे सारा बैकग्राउंड ब्लर है... वैसे ही इस कहानी में इस तीन किरदारों के पीछे पूरी कहानी ब्लर हो गई है। 

 

डायरेक्शन 

आनंद एल राय इमोशनल डायरेक्टर हैं, अपने किरदारों में खो जाने वाले। इस बार भी वो अपने किरदार में खोकर, कहानी को भूल गए हैं। रिंकू सूर्यवंशी बनी सारा अली ख़ान की बीमारी दिखाने के चक्कर में उन्होने जितने जतन किए हैं, वो सब कैमरे के सामने फेल हो गएं। 

इमोशन पर रोना नहीं आया, कॉमेडी पर हंसना नहीं आया। जिन सीन्स में अक्षय और धनुष के बीच की तकरार, अक्षय का हाथ काटना, ऑपरेशन थियेटर का ड्रामा दिखाकर फिल्म को इंटेंस करना था, वो सारे सीन्स एक के बाद एक चूकते चले गए। मानसिक बीमारी को संजीदगी दिखाने की बातें खूब की, लेकिन उसे कॉमेडी बनाकर छोड़ दिया। आनंद एल की सारी फिल्मों में पैरेलल कैरेक्टर का बैकग्राउंड फिल्म को मज़बूत बनाता है, लेकिन अतरंगी रे में दूसरे कैरेक्टर्स पर कैमरा घूमा तक नहीं।

 

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म्यूज़िक 

अतरंगी रे का सबसे बड़ा हाइलाईट इसका म्यूज़िक एलबम है। इरशाद कामिल के लिरिक्स और रहमान का म्यूज़िक रायते सी फैलती स्टोरी में थोड़ा ठहराव देता है। चकाचक का असर फिल्म में दिखता है। श्रेया घोषाल की आवाज़ आपके कदम थिरकाती है। अरिजीत सिंह और साशा की आवाज़ में रेत ज़रा सी भी अपना गहरा असर छोड़ती है। धनुष की आवाज़ में लिटिल-लिटिल का बड़ा असर दिखने वाला है। अक्षय कुमार पर फिल्माया गरदा गाना एंड क्रेडिट्स में इस्तेमाल हुआ है। उसकी वहीं ज़रूरत भी थी।

परफॉरमेंस 

अतरंगी रे की सबसे मजबूत बुनियाद है – धनुष। इतना टैलेटेंड एक्टर, जो फिसलती कहानी में भी संभल सकता है। आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकता है। तमिल बोलकर भी हिंदी वालों को अपनी बात समझा सकता है, वो धनुष की काबिलियत है। शानदार धनुष।

अब आइए सारा अली ख़ान पर, तो डायरेक्टर ने समझाकर, राइटर ने डायल़ॉग्स में बिहार की बोली और गालियां भरकर और सीमा बिस्वास ने ट्रेनिंग देकर खूब कोशिश की, कि सारा इमोशन में जान डाल सकें। मगर ये हो ना सका। सारा चकाचक तो ज़रूर लगी हैं, लेकिन रिंकू सूर्यवंशी बनने में ग्रेस से भी पास नहीं हो पाई हैं।

सज्जाद अली खान के किरदार के लिए अक्षय ने अतरंगी रे में साइड रोल लेना कुबूल किया। उनके लिए ज़बरदस्त एंट्री सीन भी प्लान किए गएं। जादूगर की ज़बरदस्त ट्रिक्स भी रखी गईं। सारा के अपोज़िट बड़ी उम्र के, बालों में सफेदी लिए हीरो की वजह भी समझाई गई, लेकिन इन सबके बाद भी अक्षय के लिए फिल्म में करने को कुछ ख़ास था नहीं। और रोते हुए अक्षय इस अतरंगी रे में जमें नहीं।

सीमा बिस्वास जैसी बेहतरीन कैरेक्टर को कुछ सीन्स में सिमटाकर छोड़कर दिया गया। धनुष के बाद उनके दोस्त बने आशीष शर्मा ने अतरंगी रे में ज़्यादा असर छोड़ा है। बाकि कैरेक्टर तो DOP के आउट ऑफ़ फोकस का शिकार हो गए।

क्यों देखें ?

अब इतना कुछ कहने-सुनने के बाद भी कुछ रह जाता है, तो आपके पास टाइम ज़्यादा हो तो देख लीजिए। या फिर 83 जैसी शानदार फिल्म देखने से कोई आपको रोक रहा हो, तो उसे ये दुश्मनी में अतरंगी रे दिखा दीजिए। फिल्म को 2 स्टार।

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first published:Jan. 28, 2022, 4:53 p.m.

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