Tadap Review:प्यार के पंक्षियों की 'तड़प' को बयां करने में कितने सफल रहें अहान-तारा, पढ़ें रिव्यू

E24

फिल्म - तड़प

कलाकार - अहान शेट्टी और तारा सुतारिया

डायरेक्टर - मिलन लुथ्रिया

स्टार -  3

अश्विनी कुमार- किसी को ऐसी भी मोहब्बत ना करो कि नज़रों पर परदा पड़ जाए और तुम कुछ और बन जाओ। मगर इश्क़ तो ऐसा ही होता है, कि जब होता है तो कुछ और नहीं दिखता। जब दिखता है, तो लगता है ठगे हैं। तड़प की कहानी भी ऐसी ही है। धर्मा और यशराज की मोहब्बत से उलट.... जहां लड़का, लड़की से टूट के प्यार करता है। बड़े घर की लड़की की शादी कहीं और जाती है। लड़का दीवाना हो जाता है। बदला लेने पर उतारू... । अब आप कहेंगे कि ये तड़प कौन सी नई है, बड़े घर की लड़की और छोटे घर का लड़का, फिर बिछड़ना... ये तो ट्रेडिशनल फॉर्मूला है। जी जनाब, बिल्कुल है। लेकिन तड़प उसके आगे जाती है। इश्क़ का परदा हटाती है, कुछ सच दिखाती है। बताते चलें कि तड़प तेलुगू फिल्म RX100 का हिंदी रीमेक है, जो असल में एक असली कहानी से इंस्पायर्ड है। और डिस्क्लेमर ये है कि मैने तेलुगू फिल्म RX100 नहीं देखी। इसीलिए लड़कों के लिए तड़प देखना ज़रूरी है। और ये जो ये कहते हैं कि लड़की के प्यार में कोई लड़का इतना दीवाना कैसे हो सकता है... तो उनसे कहिए जो दीवाना नहीं हुआ, उसने प्यार क्या किया। 

तो तड़प की कहानी को हम आगे नहीं बढ़ाते, इसके क्रिटिकल रिव्यू पर आते हैं। कहानी का फर्स्ट हॉफ़... बिल्कुल वैसा है, जैसा बॉलीवुडिया फिल्मों में होता है। यानि लड़का-लड़की मिलते हैं... प्यार होता है। बंदिशें तोड़ी जाती हैं, छिप-छिपके वायदे होते हैं। और फिर लड़की किसी और की हो जाती है। यानि इतना ट्रेडिशनल कि आप कहते हैं कि पिक्चर में तो कुछ हो ही नहीं रहा है। और फिर इंटरवल के बाद जो पिक्चर शुरु होती है, वो आपका दिमाग़ घुमा देती है। फिल्म की शुरुआत अहान के फिट बॉडी और ताबड़तोड़ एक्शन के साथ होता है, ज़ाहिर है डायरेक्टर मिलन लुथरिया का मोटिव ये है कि पहले 10 मिनट के अंदर ही ऑडियंस को अहसास हो जाए कि एक स्टार सन अब स्टार बन चुका है। वैसे भी स्क्रीन प्ले की ज़िम्मेदारी रजत अरोड़ा पर है, जो मिलन लुथरिया के साथ मिलकर सीटी मार डायलॉग्स देने में माहिर हैं। यहां भी उन्होने यही करने की कोशिश की है, लेकिन 80’s के फॉर्मूले पर फर्स्ट हॉफ़ कहानी के हिसाब से बहुत ढीला है। आपकी निगाहें या तो अहान की फिज़ीक पर होती हैं, या फिर तारा सुतारिया की खूबसूरती पर। 

सेकेंड हॉफ़ गोली की रफ्तार सा निकलता है और ट्विस्ट टर्न और एक्शन की बयार लेकर आता है। यही पेस फिल्म की शुरुआत से बना रहता, तो तड़प के लिए दीवानगी और होती। ज़ाहिर है कहानी में धार की कमी है। हीरो के दिल की तड़प परफॉरमेंस पर आएं, तो सुनील शेट्टी के साहबज़ादे अहान की ये डेब्यू फिल्म है। अहान ने तैयारी भी खूब की है, वो स्क्रीन पर दिख रही है। अहान का स्क्रीन प्रेजेंस कमाल का है। और मसूरी की वादियों में तारा के साथ उनका रोमांस भी इंटेंस है। हां एक्सप्रेशन्स और डांस पर अभी बहुत गुंजाइश है।

तारा सुतारिया अपनी तीसरी फिल्म में निखरकर सामने आई हैं। खूबसूरत तो वो है हीं, इस बार उनके कैरेक्टर को भी जो डायमेंशन मिला है, वो तारा के लिए एक नई जर्नी की शुरुआत करने वाला है। तारा के पापा MLA दामोदर नौटियाल बने कुमुद मिश्रा अपने रोल में ऐसे जंचे है कि पूछिए नहीं। कमाल का काम है। और अहान के कैरेक्टर ईशाना के गार्डियन डैडी बने सौरभ शुक्ला तड़प की जान है, उनके डायलॉग्स शानदार है और प्रेजेंस दमदार। तड़प अच्छी है, ये शानदार हो सकती थी अगर इसके स्टोरी, स्क्रीनप्ले को स्टार सन के लॉन्च पैड के हिसाब से ना चुना, ना बुना जाता। मगर अहान के ज़बरदस्त डेब्यू के लिए इसे देखना तो बनता है। तड़प को 3 स्टार।

first published:Dec. 3, 2021, 3:43 p.m.

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