फिल्मी पर्दे पर नागिन बनते ही सुपर स्टार बन गईं थी श्रीदेवी, नगीना का कोई मुकाबला नहीं

By Neetu July 25, 2020, 4:11 p.m. 1k

नम्रता शर्मा - यूं तो फिल्मी पर्दे पर कई बार सांप और नागिन की कहानियां दर्शायी गईं लेकिन यकीन मानिए आज भी अगर कहीं बीन बजती सुनाई दे जाए तो 1986 में आई श्रीदेवी के फिल्म नगीना की याद आ जाती है। ऐसा लगता है जैसे श्रीदेवी(Sridevi) से बेहतर नागिन का किरदार आज तक किसी ने निभाया ही नहीं है। फिल्मी पर्दे पर नागिन वाली कहानी को निर्माताओं ने कई बार भुनाया लेकिन श्रीदेवी का तोड़ आज तक कोई हसीना नहीं कर पाई। फिर चाहे रीना राय की नागिन ही ले लीजिए। किसी ने सोचा नहीं था कि श्रीदेवी रीना राय को भी पछाड़ जाएंगी।

1986 में आई नगीना(Nagina) ने असल में नागिन को बड़े पर्दे पर कैसे देखना है ये तय किया। श्रीदेवी ने बताया कि जहर सिर्फ रगों में ही नहीं बल्कि आंखों में भी हो सकता है। इस बात की सीख श्रीदेवी ने आने वाली हसीनाओं को दी जो पर्दे पर नागिन बनने की इच्छा रखती थी। फिल्म का गाना मैं तेरी दुश्मन इतने दशक बाद भी इतना मजबूती से अपनी पकड़ बनाए हुए हैं कि इसे बार-बार अगर आप लूप पर भी देखेंगे तो बोर नहीं होंगे।

श्रीदेवी की फिल्म नगीना ने दर्शकों को तो मनोरंजन दिया ही साथ ही ये फिल्म श्रीदेवी के करियर की भी बेमिसाल फिल्म साबित हुई और इस फिल्म ने श्रीदेवी को रातों-रात एक चमकता सितारा बना दिया। इस फिल्म में श्रीदेवी की एक्टिंग ने उन पैमानों को छू लिया जिसका मुकाबला बाद में कोई हीरोइन कर ही नहीं पाई। बिना कोई डायलॉग बोले सिर्फ आंखों से ऐसे डरावने एक्सप्रेशन देना आम बात तो नहीं थी।

मजे की बात ये है कि उस दौरान ना ही कोई वीएफएक्स चलते थे ना हरा परदा था। सब कुछ एक्टर के ही हाथ में था ।अपनी बड़ी बड़ी आंखों को डरावना बनाने के लिए श्रीदेवी ने लेंस पहने थे। ये लेंस उनकी आंखों पर इस कदर प्रभाव कर रहे थे कि डॉक्टर ने उन्हें चेतावनी दी थी कि उनकी आंखों की रोशनी भी जा सकती है लेकिन श्रीदेवी अपने काम में इतनी मशगूल रही कि उन्होंने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। 

दरअसल नागिन के किरदार को शत-प्रतिशत निभाने के लिए श्रीदेवी बार बार अपनी आंखों में लेंस बदल रही थी लिहाजा डॉक्टरों ने उन्हें ऐसा ना करने की सलाह दी थी। बताया जाता है श्रीदेवी की आंखों को सही सलामत रखने के लिए उनकी आंखों में बार-बार ड्राप डाली जाती थी।

यही तो वजह है कि आज भी जब भी कभी फिल्मी नागिन की बात होती है तो श्रीदेवी का चेहरा अचानक जहन में आ जाता है। बड़ी-बड़ी आंखें, हाथों से पंख फैलाए, सफेद ड्रेस में श्रीदेवी की तस्वीर उभर आती है। क्या इसके अलावा किसी का चेहरा जहन में आता है? जरा सोचिए !

आपको ये भी बता दें इस फिल्म में श्रीदेवी से पहले जयाप्रदा(Jayaprada) को कास्ट करने का इरादा बनाया गया था। जब फिल्म निर्माता जयप्रदा के पास पहुंचे और इस फिल्म की कहानी सुनाई तो जयप्रदा सांपों के साथ करने वाले सीन में घबरा गई और उन्होंने इस फिल्म को करने से मना कर दिया। इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने श्रीदेवी के घर का रुख किया। जिन दिनों फिल्म निर्माता श्रीदेवी के पास पहुंचे उन दिनों वो काफी बीमार चल रही थी। वो बुखार में थी। उन्होंने ऊपरी तौर पर कहानी को पढ़ा और हामी भर दी।

इसमें कोई दो राय नहीं कि इस फिल्म ने श्रीदेवी को टॉप हीरोइन की कैटेगरी में पहुंचा दिया था। 1985 में श्रीदेवी ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात को कुबूल किया था। उन्होंने बताया था कि इस फिल्म ने मुझे उन हीरोइन की कैटेगरी में पहुंचा दिया था जो अपने कंधों पर फिल्म चला सकती थी। इतना ही नहीं ये फिल्म उनके करियर की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में उनके करियर को उन ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया था जहां पहुंचना उनके दौर की हीरोइनों का सपना था। श्रीदेवी की परफॉर्मेंस की तारीफ तो इस फिल्म के जरिए हुई ही बॉक्स ऑफिस पर भी नगीना ने झंडे गाड़ दिए थे।

साल 1986 में आई नगीना के बाद जैसे श्रीदेवी की गाड़ी पटरी पर दौड़ने लगी। श्रीदेवी ने इस फिल्म के बाद बहुत सारी सुपरहिट फिल्में दी जिनमें मिस्टर इंडिया, सोने पर सुहागा, चांदनी, चालबाज, जुदाई आदि थी और सफल हीरोइनों की लिस्ट में अपना नाम सबसे ऊपर बनाने में कामयाब रही। 

आज श्रीदेवी भले ही हमारे बीच में नहीं है लेकिन जब जब उनकी सफल फिल्मों की बात होती है तब तब साल 1986 में आई नगीना का जिक्र जरूर होता है और जब जब उनके गानों का जिक्र होता है तब मैं तेरी दुश्मन गाना जरूर जहन में आता है।

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