एक लाख की सैलरी वाली नौकरी छोड़ आर्मी में गए थे विक्रम बत्रा, दो फिल्में उनपर बन चुकी हैैं...

By Neetu July 7, 2020, 5:04 p.m. 1k

नीतू कुमार  -  लहराते तिरंगे के पीछे आऊंगा या तिरंगे में लिपटा हुआ आऊंगा... लेकिन आउंगा जरूर... करगिल युद्ध के दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा ( Vikram Batra ) ने अपनी मां से फोन पर यही कहा था। बेटा जब युद्ध भूमि में गया था तब मां ने भी कहां सोचा होगा कि वो आखिरी बार अपने लाल को देख रही है। देश के हीरो परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने भी अपना हीरो माना और देश के वीर सपूत पर फिल्में बनाई। फिल्म LOC करगिल में उनकी कहानी को विस्तार से दिखाया गया था। अभिषेक बच्चन ने उनका रोल किया था। 

कैप्टन विक्रम बत्रा 24 साल की उम्र में शहीद हो गए थे। करगिल युद्ध में वीरता के लिए उन्हें परमवीर चक्र मिला था। सिद्धार्थ मल्होत्रा  करगिल हीरो विक्रम बत्रा के किरदार को बड़े पर्दे पर उतारने जा रहे हैं।  फिल्म का नाम शेरशाह ( Shershaah ) है। ये फिल्म 3 जुलाई को रिलीज होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस की वजह से फिल्म की रिलीज टल गई। विक्रम बत्रा की शहादत दिवस पर  धर्मा प्रोडक्शन ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। 

करगिल विजय को 21 साल होने वाले हैं । 26 जुलाई 1999 को जीत का ऐलान हुआ था। देश उस युद्ध के शेर विक्रम बत्रा को नहीं भूला है। विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में हुआ था। 1996 में विक्रम ने इंडियन मिलिटरी अकादमी में दाखिला लिया। CDS के जरिए वो सेना में शामिल हुए। तब 22 साल की उम्र रही होगी। इससे पहले वो मर्चेंट नेवी में चुन लिए गए थे। 

करीब 1 लाख की सैलरी थी लेकिन ज्वाइन करने के दो दिन पहले विक्रम बत्रा ने सेना में जाकर देश की सेवा करने का मन बना लिया। उस वक्त उनकी सेना में सैलरी करीब 20-22 हजार रही होगी । विक्रम ने देश के लिए आर्मी ज्वाइन की। 6 दिसंबर 1997 को कैप्टन बत्रा जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13 वीं बटालियन में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल हुए। दो साल बाद ही उन्हें प्रमोट कर कैप्टन रैंक दी गई। कारगिल युद्ध में उन्होंने जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13 वीं बटालियन का नेतृत्व किया ।

20 जून 1999 को कैप्‍टन बत्रा ने कारगिल की प्‍वाइंट 5140 से दुश्‍मनों को खदेड़ने के लिए अभियान छेड़ा और कई घंटों की गोलीबारी के बाद सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर अपने मिशन में कामयाब हो गए। इसे जीतते ही विकम बत्रा अगले प्वांइट 4875 को जीतने के लिए चल दिए, जो सी लेवल से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर था और 80 डिग्री की चढ़ाई पर पड़ता था।

परमवीर चक्र पाने वाले विक्रम बत्रा आखिरी हैं। 7 जुलाई 1999 को एक जख्मी ऑफिसर को बचाते हुए विक्रम बत्रा शहीद हो गए थे। ऑफिसर को बचाते हुए कैप्टन ने कहा था - तुम हट जाओ, तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं। जब तक जिंदा रहे, तब तक अपने साथी सैनिकों की जान बचाते रहे ।

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