Taandav Review : दिलचस्प किरदार और शानदार एक्टिंग, राजनीति का काला सच दिखाती है ये वेबसीरीज

By Neetu Jan. 15, 2021, 8:28 p.m. 1k

 

वेब सीरीज: तांडव

कलाकार : सैफ अली खान, डिंपल कपाड़िया, सुनील ग्रोवर, मोहम्मद जीशान अयूब, तिग्मांशु धूलिया 

डायरेक्टर : अली अब्बास जफर

एपिसोड : 9 एपिसोड/  अवधि - 40 मिनट

रेटिंग : 3 

नीतू कुमार -  राजनीति का स्याह रंग दिखाती है 'तांडव' ( Taandav) । हर कदम पर धोखा, कुर्सी के लिए जानलेवा साजिश, लालच, नफरत और जलन से भरी हुई है अली अब्बास जफर की बेवसीरीज । सीरीज में आज की राजनीति को दिखाने का दावा किया गया है।  कहानी में दक्षिण पंथी पार्टी की सत्ता और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप,जातिवाद, किसान आंदोलन और युनिवर्सिटी की आजादी गैंग को भी शामिल किया गया है। अमेजन प्राइम वीडियो पर राजनीतिक ड्रामा ताडंव 15 जनवरी से स्ट्रीम कर दिया गया है। सीरीज में स्टार्स की फौज है। लीड किरदार सैफ अली खान ( Saif Ali Khan), सुनील ग्रोवर, जीशान अय्यूब और डिंपल कपाड़िया ने निभाया है। 

कहानी -  जन लोक दल  एक दक्षिणपंथी पार्टी है।  लगातार तीसरी बार जीत की कगार पर है और  देवकी नंदन (तिग्मांशु धूलिया) फिर प्रधानमंत्री बनने को तैयार हैं । चुनाव के नतीजे आने से पहले ही उनकी संदिग्ध मौत हो जाती है। देवकी नंदन के निधन के बाद उनके बेटे समर प्रताप सिंह  ( सैफ अली खान ) के पीएम बनने की चर्चा होती है लेकिन तभी उसके साथ खेल हो जाता है। देवकी नंदन की करीबी अनुराधा किशोर समर प्रताप की चाल समझ जाती है और फिर वो उसे ब्लैकमेल करती है लिहाजा समर को पीएम पद की दावेदारी छोड़नी पड़ती है। इसके बाद पक्ष विपक्ष पक्ष- विपक्ष के बीच ही नहीं बल्कि जन लोक दल  पार्टी  बीच भी उथल पुथल शुरू हो जाती है। प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए कई दावेदार खड़े हो जाते हैं । उसके पिता का करीबी गोपाल दास मिश्रा ( कूमुद मिश्रा) भी समर का विश्वास पात्र नहीं है।  इस रेस में समर भी हार नहीं मानता आखिर वो भी राजनीति का शातिर खिलाड़ी है। समर का करीबी गुरपाल उसका साथ देता है ( सुनील ग्रोवर)  इसी बीच विवेकानंद नेशनल यूनिवर्सिटी का युवा छात्र नेता शिवा शेखर (मोहम्मद जीशान अय्यूब)   किसान आंदोलन को सपोर्ट करता है और फिर पॉपुलर हो जाता है। ऐसे में समर सत्ता पाने के लिए शिवा शेखर को अपनी तरफ कर लेता है....लेकिन तमाम विरोधियों के बीच क्या उसका पीएम बनने का सपना पूरा हो पाता है ?

हमारी राय - अली अब्बास जफर मंझे हुए निर्देशक हैं।  तांडव को उन्होंने हिंदी सिनेमा के कलेवर के साथ बनाया है। सीरीज ढेरों ट्विस्ट और टर्न्स हैं। तांडव की कहानी की शुरुआत धीमी लगती है क्योंकि तीन एपिसोड तक तो सभी किरदारों से परिचय होता रहता है। वहीं कई बार बेवसीपरीज डॉक्युमेंट्री की तरह लगती है । शुरुआत में रफ्तार स्लो है कि बाद में आपको शो देखने में मजा आने लगता है। बेवसीरीज के 9 एपीसोड देखने में आपको धीरज रखना होगा। स्क्रीन प्ले शानदार है लेकिन डॉयलॉग पर फोकस नहीं किया गया है। अब एक्टिंग की चर्चा करते हैं।  सैफ अली खान की बात करें तो एक घाघ और सत्ता के भूखे बेटे की भूमिका में उन्होंने दिल जीत लिया है । डार्क किरदार में वो हमेशा सबपर भारी पड़ते हैं। उनके करीबी के रोल में सुनील ग्रोवर ने भी गजब का काम किया है। वहीं डिंपल कपाड़ियां ने सितारों की भीड़ में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करवाई है। जीशान अय्यूब अच्छे एक्टर हैं और तांडव में भी उनका काम शानदार है। अगर आपकी राजनीति में रूचि है तो इस वीकएंड देख डालिए ताडंव। ओवल ऑल देखा जाए तो बढ़िया बेवसीरीज है। हमारी तरफ से 3 स्टार

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