Dil Bechara Review - जब तक दुनिया में हो जिंदादिली से जियो.. खुश रहो, यही संदेश दे गए सुशांत

By Neetu July 25, 2020, 4:23 a.m. 1k

फिल्म - दिल बेचारा 

कलाकार - सुशांत सिंह राजपूत,संजना सांघी,स्वास्तिका मुखर्जी,साश्वता चटर्जी, साहिल वैद्य

मूवी टाइप - रोमांस

अवधि- 1 घंटा, 41 मिनट 

डायरेक्टर- मुकेश छाबड़ा 

रेटिंग - 4 स्टार  

नीतू कुमार - खत्म हुआ सुशांत के फैंस का इंतज़ार, उनकी आखिरी फिल्म दिल बेचारा रिलीज हो गई है। सुशांत के चाहने वाले इस फिल्म को सिनेमाघरों में देखना चाहते थे लेकिन अफसोस फैंस की ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाई। वजह हम सब जानते हैं।  24 जुलाई शाम 7.30 बजे से फिल्म डिज़्नी हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है। इसमें कोई शक नहीं की ओटीटी पर रिलीज होने वाली किसी भी फिल्म के प्रीमियर को एक साथ इतने लोगों ने नहीं देखा होगा। दिल बेचारा को एक साथ दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने देखा। 2012 में आई जॉन  ग्रीन के इंग्लिश नॉवल पर  'द फॉल्ट इन ऑवर स्टार्स' पर बेस्ड है फिल्म। हॉलीवुड में इस नॉवेल पर फिल्म पहले ही बन चुकी है। दिल बेचारा एक रोमांटिक और ट्रैजिक लव स्टोरी है। 'जन्म कब लेना है और कब मरना है ये तो हम डिसाइड नहीं कर सकते, लेकिन कैसे जीना है ये हम डिसाइड करते हैं।' फिल्म का ये डॉयलॉग आपको याद रह जाता है और यहीं संदेश इस फिल्म के जरिए देकर गए हैं सुशांत सिंह राजपूत ।

कहानी - दिल बेचारा की कहानी झारखंड के जमशेदपुर शहर से होती है। किजी बासु ( संजना सांघी Sanjana Sanghi ) थायरॉयड कैंसर की मरीज है। ऑक्सीजन सिलेंडर, नाक में पाइप, ढेर सारी दवाईयां और अस्पताल ही उसकी जिंदगी बन गए हैं। कैंसर से जूझती किजी की मां ( स्वातिका मुखर्जी) उसका ख्याल रखती है। किजी के पिता   ( साश्वता चटर्जी ) बेटी के लिए दुखी रहते हैं लेकिन अपना दर्द छुपाकर रखते हैं। किजी एक आम लड़की की जिंदगी जीना चाहती है, उसे भी किसी प्रिंस चार्मिंग का इंतजार है, वो बहुत उदास रहती है लेकिन तभी उसकी लाइफ में एक मस्तमौला लड़का आता है। नाम है इमैनुअल राजकुमार जूनियर उर्फ मैनी ( सुशांत सिंह राजपूत Sushant Singh Rajput )  है। पहले तो किजी उसके एक्ट्रा फ्रेंडली नेचर से परेशान हो जाती है लेकिन जब उसे पता चला है कि मैनी भी कैंसर से पीड़ित है, ऑस्ट्रियोसर्कोमा कैंसर की वजह से एक टांग गंवा चुका है तो वो अचानक उसे रियल जिंदगी का हीरो मान लेती है। यहीं सोचती है कि कैंसर से  अपनी टांग गवा देने वाला मैनी इतना जिंदादिल और खुशमिजाज कैसे है। मैनी को देख  कहती है 'हीरो बनने के लिए पॉपुलर नहीं होना पड़ता, वो रियल लाइफ में भी होते हैं।' किजी और मैनी दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती है और फिर प्यार भी शुरू हो जाता है। मैनी का बेस्ट फ्रेंड जेपी ( साहिल वैद्य ) को आंखों का कैंसर (ग्लूकोमा ) है। उसकी एक आंख की रोशनी जा चुकी है और कुछ दिन बाद दूसरी आंख का ऑपरेशन होना है जिसके बाद वो बिल्कुल भी देख नहीं सकेगा । तीन कैंसर पीड़ित मिलते हैं और अपना दुख भूल जाते हैं। जेपी एक भोजपुरी फिल्म बना रहा है जिसका हीरो मैनी और हीरोइन किजी होती है। तीनों साथ खुश हैं। मैनी रजनीकांत का फैन है तो किजी म्यूजिशियन  अभिमन्यू वीर ( सैफ अली खान ) की दीवानी है । वो उससे बस एक बार मिलना चाहती है। मैनी अभिमन्यू से मिलाने के लिए किजी को लेकर पेरिस जाता है। दोनों रोमांस के शहर पैरिस में अच्छा वक्त गुजारते हैं, वहीं पैरिस में मैंनी किजी के सामने  एक बड़ा खुलासा करता है।  फिल्म  आगे क्या मोड़ लेती है ? क्या किजी और मैनी साथ रह पाते हैं ?  ये आप फिल्म देखकर जानिए  

हमारी राय - दिल बेचारा पूरी तरह से सुशांत की फिल्म है।  जैसे ही उनकी एंट्री होती है माहौल बदल जाता है। सुशांत की एक्टिंग प्रभावित करती हैं। उनका लुक भी ध्यान खींचता है। उनको देखकर मन से टीस उठती है। आखिर क्यों वो अब इस दुनिया में नहीं हैं। संजना सांघी की बतौर लीड एक्ट्रेस ये पहली फिल्म है। वो कॉंफिडेंट और क्यूट दिखीं हैं। साहिल वैद्य का काम भी असरदार है।  स्वास्तिका मुखर्जी किजी की मां के रोल में जबरदस्त हैं। साश्वस्‍त चटर्जी बिंदास पिता के रोल में पसंद आते हैं। मुकेश छाबड़ा ने इस फिल्म से डायरेक्शन में कदम रखा है। कैंसर जैसे संवेदनशील विषय को उन्होंने बखूबी संभाला है। फिल्म का सिनेमैटोग्राफी जानदार है। जमशेदपुर और पेरिस शहर को बहुत खूबसूरती से फिल्म में दिखाया गया है। एडिटिंग के मामले में भी दिल बेचारा बेहतरीन है। ए आर रहमान ने फिल्म में मेलोडियस म्यूजिक दिया है। अमिताभ भट्टाचार्य ने दिल छू लेने वाले गाने लिखे हैं। सुशांत की ये फिल्म जिंदगी जीना सिखाती है। भले ही कितने भी दुख हो मुस्कुराने का संदेश देती है। हमारी तरफ से इस फिल्म को 4 स्टार। 

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