Amitabh और Ayushmann की शानदार जुगलबंदी, इनके फैन हैं तो जरूर देखिए Gulabo Sitabo

By Neetu June 12, 2020, 1:48 p.m. 1k

फिल्म-  गुलाबो सिताबो 

कलाकार - अमिताभ बच्चन, आयुष्मान खुराना, विजय राज

निर्देशक शूजीत सरकार  

रेटिग्स - 3.5 स्टार 

नीतू कुमार - अमिताभ बच्चन ( Amitabh Bachchan) और आयुष्मान खुराना ( Ayushmann Khurrana) जैसे एक्टिंग के महारथियों की  फिल्म गुलाबो सिताबो OTT पर रिलीज हो गई है । कोरोना वायरस के दौर में जब सिनेमा हॉल्स बंद हैं ऐसे में गुलाबो सिताबो ( Gulabo Sitabo Review ) सिनेमा प्रेमियों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है ।  शूजित सरकार निर्देशित 'गुलाबो सिताबो' अमेज़न प्राइम वीडियो पर 200 देशों में 15 भाषाओं के सबटाइटल्स के साथ रिलीज़ हो गयी है । कोरोना काल में बॉलीवुड ने एक नया प्रयोग गुलाबो सिताबो जैसी फिल्म के साथ किया है।  गुलाबो सिताबो कहानी है अपनी वीबी के पुश्तैनी फातिमा महल को पर कब्जा जमाने के ख्बाव रखने वाले मिर्जा और उसके किराएदार बांके रस्तोगी की ।  

कहानी - लखनऊ की एक पुरानी और जर्जर हवेली फातिमा महल में मिर्जा शेख ( अमिताभ बच्चन ) अपनी बेगम के साथ रहता है। मिर्जा का एक ही सपना है कि उसकी बीवी मर जाए, किराएदार भाग जाए और हवेली पर पूरी तरह से उसका कब्जा हो जाए। हवेली में  किराएदार बांके रस्तोगी ( आयुष्मान खुराना) से आए दिन उसकी अनबन होती रहती है। आटे की चक्की में काम करने वाला बांके रस्तोगी अपनी तीन बहनों और मां के साथ सालों से वहां रह रहा है। रस्तोगी की एक गर्लफ्रेंड भी है जो उसकी गरीबी से परेशान रहती है। 

मिर्जा अक्सर अपने किराएदारों का सामान चोरी कर उसे बेच देता है। वहीं बेगम से भी कुछ पैसे मांगता रहता है। बेगम को मिर्जा की नीयत पता है इसलिए वो उसको अपने आस-पास फटकने नहीं देती। दिन रात हवेली के लिए परेशान मिर्जा के फातिमा महल पर पुरातत्व विभाग के एक भ्रष्ट कर्मचारी की भी नजर होती है। पुरातत्व विभाग एक नेता के लिए फातिमा महल पर कब्जा जमाना चाहता है तो वहीं बांके एक बिल्डर को ले आता है। ऐसे में क्या मिर्जा अपनी बीवी की हवेली पर कब्जा कर पाता है ? ये जानने के लिए आप फिल्म देखिए। 

हमारी राय - अमिताभ बच्चन इस फिल्म की रूह हैं। लालची और काईयां  मिर्जा का किरदार उन्होंने लाजवाब तरीके से निभाया है। उनकी आवाज बदली हुई है, चाल ढाल बदली हुई है। पूरी फिल्म पर उनकी जबरदस्त छाप है। आयुष्मान खुराना ने भी गजब की एक्टिंग की है । मां-बहनों की जिम्मेदारी और मिर्जा के तिकड़म से परेशान बांके के रोल में वो दिल को छूते हैं। फिल्म की कहानी बहुत खूबसूरती से लिखी गई है। शूजीत सरकार का एक अलग तरह का काम आपको इस फिल्म में दिखता है। लखनऊ शहर की नब्ज को उन्होंने अच्छे से पहचाना है और फिल्म में अच्छे से पिरोया है। अमिताभ बच्चन के जबरा फैंस को ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए। हमारी तरफ से फिल्म 3.5 स्टार ! 

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