मीना कुमारी की 10 यादगार फिल्में, जिनसे कायम रहा ट्रैजेडी क्वीन का खिताब

By Arunima Aug. 1, 2020, 5:10 p.m. 1k

अपने दौर की मशहूर एक्ट्रेस मीना कुमारी (Meena Kumari) का आज 86वां जन्मदिन है। लोग मीना कुमारी को ट्रेजडी क्वीन से लेकर सिंड्रेला तक के नाम से जानते हैं। 1 अगस्‍त, 1932 को जन्मीं मीना कुमारी का असल नाम महज़बीन था। मीना कुमारी ने अपने करियर की शुरुआत साल 1939 में आई फिल्म ‘लेदरफेस’ से की थी। बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट ग्यारह फिल्में करने के बाद उनको ‘बच्चो का खेल’ में लीड एक्ट्रेस बनने का मौका मिला। तब मीना 13 साल की थीं। मीना काम तो कर रही थीं, लेकिन एक अदाकारा के नाम में वो मुकाम हासिल नहीं हो पाया। आखिर साल 1952 में आई फिल्म ‘बैजू बावरा’ ने उनको बुलंदियों तक पहुंचाया। मीना ने तीस साल के करियर में तकरीबन 90 फिल्मों में काम किया और जानते है उनकी 10 बेहतरीन फिल्में।

दिल अपना और प्रीत पराई

किशोर साहू के निर्देशन में बनी फिल्म ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ भी मीना कुमारी की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। उनकी अदाकारी को इस फिल्म में काफी सराहा गया था। इस फिल्म को मीना के पति कमाल अमरोही ने प्रोड्यूस किया था। साल 1960 में आई यह फिल्म एक रोमैंटिक ड्रामा फिल्म थी, जिसमें मीना के साथ राज कुमार और नादिरा मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म का गाना ‘अजीब दास्तां है ये’ आज की जनरेशन भी गुनगुनाती है।

एक ही रास्ता

बी आर चोपड़ा की साल 1956 में आई फिल्म ‘एक ही रास्ता’ को भी मीना कुमार की बेहतरीन अदाकारी के लिए जाना जाता है। इस पारिवारिक फिल्म में मीना कुमारी और अशोक कुमार की जोड़ी देखने को मिली। इस फिल्म में सुनील दत्त भी नज़र आए। यह फिल्म 25 सप्ताह तक चली और जुबली हिट साबित हुई।

बैजू बावरा

साल 1952 में रिलीज हुई फिल्म ‘बैजू बावरा’, वो पहली फिल्म थी, जिसके लिए मीना कुमारी को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। इस म्यूज़िकल फिल्म में मीना कुमारी के साथ भरत भूषण मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म में सोलहवीं शताब्दी का मुगल कालीन भारत दर्शाया गया था। 

परिणीता

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘परिणीता’ में मीना कुमारी केंद्रीय भूमिका निभाती नज़र आईं। इस फिल्म का निर्देशक विमल रॉय ने किया था। इस फिल्म के लिए भी उनको बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था। मीना कुमारी को लगातार दूसरी बार यह अवॉर्ड मिला।  

आज़ाद

साल 1955 में ट्रेजडी क्वीन और ट्रेजडी किंग की जोड़ी पहली बार बनी। एस एम श्रीरामुलु नायडू के निर्देशन में बनी फिल्म ‘आज़ाद’ में मीनी कुमारी के साथ दिलीप कुमार की जोड़ी बनी। यह फिल्म उस साल की बड़ी हिट फिल्म करार दी गई और फिल्मफेयर ने बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन भी मीना को दिया। 

साहब बीबी और गुलाम

साहिब बीबी और गुलाम, गुरु दत्त की प्रोड्यूस की हुई और अबरार अल्वी के डायरेक्शन में बनी फिल्म थी। यह फिल्म बिमल मित्र के बंगाली उपन्यास साहेब बीबी गोलाम पर बेस्ड थी। फिल्म में मीना कुमारी, गुरु दत्त, रहमान, वहीदा रहमान और नासिर हुसैन के लीड रोल थे। फिल्म का म्यूजिक हेमंत कुमार ने दिया था। इस फिल्म ने चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते थे, जिसमें बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार भी शामिल है, जो मीना को मिला था। इस फिल्म को 13वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन बियर के लिए भी नॉमिनेट किया गया था। साहिब बीबी और गुलाम को ऑस्कर में भारत की ऑफिशियल एंट्री के रूप में भी चुना गया था।

दिल एक मंदिर

दिल एक मंदिर का डायरेक्शन सी वी श्रीधर ने किया था। इस फिल्म में मीना कुमारी के साथ राजेंद्र कुमार, राज कुमार और महमूद ने लीड रोल किए थे।शंकर जयकिशन फिल्म के म्यूजिक कंपोजर थे। यह बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट साबित हुई थी।

काजल

साल 1965 में आई फिल्म ‘काजल’ के लिए मीना कुमारी को चौथा फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। राम माहेश्वरी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मीना कुमारी के अभियन की काफी प्रशंसा हुई थी। फिल्म में धर्मेंद्र और राज कुमार भी थे।

फूल और पत्थर

इस फिल्‍म में मीना कुमारी के साथ धमेंद्र मुख्‍य भूमिका में थे। यह फिल्‍म एक गोल्‍डन जुबली हिट हुई और मीना कुमारी को बेस्‍ट एक्‍ट्रैस के लिए मनोनित भी किया गया था।   

पाकीजा

यह फिल्‍म मीना कुमारी की आखिरी व सबसे यादगार फिल्‍म मानी जाती है। इसका निर्देशन कमाल अमरोही (मीना कुमारी के पति) के द्वारा किया गया था। इसे पूरा होने में 16 साल का लंबा वक्‍त लगा था। इस फिल्‍म के साथ ही मीना कुमारी ने अभिनय जगत में अपने लिए एक अलग ही स्‍थान बना लिया था।

शारदा

प्रसाद के डायरेक्शन में बनी फ़िल्म शारदा ने मीना कुमारी को इंडियन सिनेमा की ट्रेजेडी क्वीन बना दिया था। यह उनकी राज कपूर के साथ भी पहली फिल्म थी।

Related Story