Flashback - करिश्मा कपूर कैसे चिंकारा शिकार केस से बच गईं थीं ! जानिए वजह

By Neetu May 23, 2020, 9:56 a.m. 1k

फिल्म हम साथ - साथ हैं ( Hum Saath Saath Hain) साल 1999 में रिलीज हुई थी। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता मिली थी। करिश्मा कपूर ( Karishma Kapoor) का करियर उस दौरान टॉप पर था। वो हम साथ साथ हैं में काफी खूबसूरत दिखीं थी और उनका रोल भी दिलचस्प था। करिश्मा कपूर ( Karisma Kapoor ) फिल्म में सैफ अली खान की लव इंटरेस्ट बनी थीं। ये एक पारिवारिक फिल्म थी और इसके गाने भी खूब हिट हुए थे लेकिन इस फिल्म से एक विवाद भी जुड़ा था। सलमान खान समेत सभी लीड कलाकार  चिंकारा शिकार केस में आरोपी बने लेकिन करिश्मा कपूर का नाम इस केस में नहीं आया। 

 
Karisma Kapoor

हम आपको बताते हैं कि करिश्मा क्यों चिंकारा शिकार केस से बच गईं। 1998 में वो फिल्म की शूटिंग के लिए जोधपुर तो गईं थी लेकिन जिस रात सैफ, सलमान, नीलम, सोनाली और तब्बू ब्लैक बक के शिकार के लिए गए, तब वे जोधपुर में नहीं थीं। वो किसी जरूरी काम से मुंबई आ गईं थी। शायद यही वजह है कि करिश्मा उस वक्त इस गैंग का हिस्सा नहीं बन सकीं। 

 
Hum Saath Saath Hain

दो साल पहले जब सैफ अली खान जब इस केस से बरी हुए  तो करिश्मा उनसे मिलने खासतौर से पहुंची थी। जाहिर है पिछले 22 साल में करिश्मा को बार-बार ये महसूस हुआ होगा कि अच्छा हुआ वो जोधपुर में नहीं थी और शिकार पर नहीं गईं, नहीं तो सलमान, सैफ, तब्बू, सोनाली और नीलम की तरह उन्हें भी बार - बार अदालत में हाजिरी लगानी पड़ती। कई सालों तक वो केस में उलझी रहती। खैर सलमान के अलावा इस केस से बाकी लोग बरी हो गए ।  

 
Hum Saath Saath Hain

 कहा जाता है कि  जब सलमान खान और सैफ अली खान  ने हिरण शिकार का प्लान बनाया था तब फिल्म के डायरेक्टर सूरज बड़जात्या ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। फिल्म से जुड़ी कोई एक्ट्रेस हिरण का लाल मांस खाना चाहती थी और इसी वजह सलमान और सैफ ने शिकार की प्लानिंग की थी। फिल्म की बाकी स्टारकास्ट में मोहनीश बहल और महेश ठाकुर भी थे। मोहनीश ने फिल्म में तब्बू के हसबैंड और महेश ठाकुर ने नीलम के हसबैंड का रोल किया था। जब सलमान और सैफ ने दोनों को शिकार के लिए इनवाइट किया तो उन्होंने साथ जाने से इनकार कर दिया और यह फैसला उनके लिए वरदान साबित हुआ। 

 
Hum Saath Saath Hain

वहीं करिश्मा का जोधपुर में ना होना उनके लिए वरदान बना। लेकिन इतना तय है कि अगर वो उस दौरान जोधपुर में होती तो शिकार के लिए जरूर जाती और इस केस में उनका भी नाम होता।

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