जब SUSHANT SINGH RAJPUT 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी' की शूटिंग के दौरान 4 महीने मोबाइल से दूर रहें !

By Neetu June 27, 2020, 2:40 p.m. 1k

सारिका स्वरूप - बॉलीवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant singh Rajput) ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। सुशांत ने मुंबई स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। अभी तक उनके इस फैसले के पीछे कि वजह के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। सुशांत भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन वो अपने फैन्स के दिल में आज भी जिंदा है। सुशांत ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'काए पो छे' से कि थी। 'काए पो छे' के बाद सुशांत ने यशराज बैनर के साथ फिल्म 'शुद्ध देसी रोमांस' में भी काम किया। इसके बाद वो आमिर खान की ब्लॉक बस्टर फिल्म 'पीके' में दिखे और फिर उसके बाद फिल्म 'राबता', 'ड्राइव' , 'केदारनाथ' जैसी फिल्मों में भी नज़र आए। उन्होंने अपने छोटे से करियर में ही कई कामयाब फिल्मों में काम किया था। वही बिग स्क्रीन पर उनकी आखिरी फिल्म 'छिछोरे' थी जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था। और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बेहद कामयाब भी रही थी। 

सुशांत जितने अच्छे इंसान थे उतने ही अच्छे ऐक्टर भी थे। सुशांत फिल्मों में अपने रोल के लिए बखुबी जाने जाते थे, जिसके लिए वो कड़ी मेहनत करते थे। चाहे हम फिल्म 'महेंद्र सिंह धोनी' के रोल कि बात करे या फिर 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी' कि, सुशांत ने हर रोल के लिए बहुत मेहनत की है और इसी मेहनत के दम पर उन्होनें बॉलीवुड में अपना नाम बनाया है।

बता दे सुशांत अपने रोल के लिए काफी मेहनत किया करते थे। वो अपने कैरेक्टर के लिए खुद को बिल्कुल सबसे अलग कर लेते थे ताकि उन्हें कोई डिस्टर्ब ना कर सके। इस बात का सबूत उनके फिल्म 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी' से मिलती है। जब इस फिल्म की तैयारी के दौरान सुशांत ने चार महीने तक खुद को सभी से दूर कर लिया था।सुशांत ने खुद को इस फिल्म के किरदार में ढालने के लिए मोबाइल फोन तक का यूज़ भी नहीं किया था। क्योंकि सुशांत को इस फिल्म मेें 40 के दशक का रोल प्ले करना था। उस टाईम ना फोन थे और ना इंटरनेट इसिलिए अपने इस फिल्म के किरदार को समझने के लिए उन्होंने चार महीने तक किसी और से बात नहीं की थी।

इस बात का खुलासा खुद सुशांत सिंह राजपूत ने भी एक इंटरव्यू के दौरान किया था। उन्होंने बताया था कि इस फिल्म के किरदार को समझने के लिए उन्होंने चार महीने तक किसी और से बात नहीं की थी, सिर्फ अपने किरदार के साथ ही रहे थे। उन्होंने ये भी बताया था कि वो अपने हिसाब से फिल्में चुनते हैं। उनका कहना था कि फिल्म का कॉस्ट्यूम, बोली जाने वाली ज़ुबान, वज़न को कम करना और 40 के दशक का लुक देना आसान था। लेकिन उनका मानना था कि उनके लिए ब्योमकेश बक्शी के किरदार में खुद को ढालना मुश्किल था। जिसके किरदार के लिए उन्होनें दिन- रात एक कर के खुब मेहनत किया था।

आपको बता दें कि ये फिल्म ब्योमकेश बक्शी नाम के उपन्यास पर आधारित थी, जिसे शरदिंदु बंद्योपाध्याय नाम ने लिखा था। 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी' का निर्देशन दिबाकर बनर्जी ने किया था। इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत के अलावा आनंद तिवारी, नीरज काबी, दिव्या मेनन और स्वास्तिका मुखर्जी भी नज़र आई थीं।

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