सिंधी परिवार में जन्मी SAROJ KHAN ने 12 वर्ष की उम्र में कुबूल किया था इस्लाम। जानिए क्या वजह थी !

By Neetu July 3, 2020, 2:16 p.m. 1k

पूजा राजपूत-हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री(Hindi Film Industry) को जैसे किसी की नज़र लग गई है। 2020 बॉलीवुड के लिए बेहद मनहूस साल साबित हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में बॉलीवुड एक के बाद एक कई दिग्गज सितारों को खो चुका है। इरफान खान, ऋषि कपूर, बासु चटर्जी, वाजिद खान, सुशांत सिंह राजपूत जैसै नायाब नगीनों को खो चुके बॉलीवुड को अब एक और सदमा लगा है। सरोज खान दुनिया को अलविदा कह गई हैं। 

सरोज खान(Saroj Khan) के निधन के बाद सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई है। तमाम फैंस और बॉलीवुड सेलेब्स सरोज खान को याद कर रहे हैं, और अपनी भावभीनी श्रद्धाजंलि ‘मास्टर जी’ को दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर सरोज खान की जिंदगी से जुड़ी यादों को शेयर किया जा रहा है।

सरोज खान की जिंदगी का एक सबसे बड़ा सच यह है कि वह बचपन से मुस्लिम नहीं थीं। सरोज खान सिंधी पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनका असल नाम निर्मला नागपाल था।उनके पिता का नाम किशनचंद सद्धू सिंह और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था।

सरोज खान का जन्म मुंबई में 22 नवंबर 1948 को हुआ था। 13 वर्ष की उम्र में सरोज खान ने इस्लाम धर्म कुबूल किया और हिंदू से मुस्लमान बन गईं। इस बात का खुलासा खुद सरोज खान ने अपने एक इंटरव्यू में किया था।सरोज खान के मुताबिक वह बचपन से ही इस्लाम धर्म के प्रति आकर्षित रहती थीं। इस्लाम धर्म कुबूल करने के पीछे सरोज खान ने दो वजह बताई थीं।सरोज खान के मुताबिक पहली वजह थी इस्लाम धर्म के प्रति उनका लगाव। इंटरव्यू में सरोज खान ने कहा था कि “ मैं जब छोटे बच्चों को इस्लाम का पालन करते और इबादत करते देखती थी, तो मुझे बेहद अच्छा लगता था। ऐसा मैने हिंदू धर्म में कम ही देखा था”।

इस्लाम कुबूल करने की दूसरी वजह उनके सपने से जुड़ी थी। सरोज खान ने अपने उसी इंटरव्यू में खुलासा किया था कि “बचपन से ही मुझे सपने आते थे जिसमें एक बच्ची मुझे मस्जिद के अंदर से आवाज़ देती थी। वह बच्ची मुझे अपनी मां कहती थी। और बार-बार मुझे पुकारती थी”

सरोज खान को ऐसे सपने बार-बार आते थे, जिसके बाद उन्होने इस्लाम कुबूल किया और निर्मला नागपाल से सरोज खान बन गईं। महज़ 13 वर्ष की आयु में ही सरोज खान की शादी भी हो गई थी। सरोज खान ने फिल्म कोरियॉग्राफर बी. सोहनलाल से साल 1962 में शादी रचाई थी। उस वक्त सरोज खान केवल 13 साल की थीं और सोहनलाल 41 साल के। सोहनलाल पहले से ही शादीशुदा थे और 4 बच्चों के पिता भी थे। 40 साल से ज्यादा लंबे सफर में सरोज खान ने 2000 से ज्यादा गानों को कोरियोग्राफ किया। एक वक्त में वह इंडस्ट्री की टॉप कोरियोग्राफर रहीं।

शुक्रवार सुबह 1 बजकर 52 मिनट पर सरोज खान ने आखिरी सांस ली। उनका निधन दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुआ। शुक्रवार सुबह 7 बजे मलाड स्थित मुस्लिम कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया है। इस मौके पर वहां सिर्फ उनके परिवार के सदस्य ही मौजूद थे।

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