‘नेपोटिज्म’ पर मनोज बाजपेयी ने रखी अपनी राय। इंडस्ट्री में टैलेंट को किया जाता है ‘इग्नोर’।

By Neetu June 25, 2020, 2:14 p.m. 1k

पूजा राजपूत- ऐसा पहली बार नहीं है, जब बॉलीवुड पर ‘भाई-भतीजावाद’ और ‘खेमेबाज़ी’ का आरोप लगा है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब ‘नेपोटिज्म’(Nepotism) के आरोपों के चलते हिंदी फिल्म इंडस्ट्री सीधे तौर पर दो गुटों में बंटी नज़र आ रही है।इससे पहले भी कई स्टार्स बॉलीवुड में ‘गुटबाज़ी’ के खिलाफ अपनी आवाज़ उठा चुके हैं। वो बात अलग है, कि सुशांत सिंह राजपूत(Sushanty Singh Rajput) की आत्महत्या(Suicide) के बाद ‘नेपोटिज्म’ के खिलाफ उठाई जा रही आवाज़ों का शोर कुछ ज्यादा ही सुनाई दे रहा है।

अब दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी(Manoj Bajpayee) ने ‘नेपोटिज्म’ और ‘खेमेबाज़ी’ जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने माना है, कि हम उस समाज में रहते हैं जहां टैलेंट को देखते ही उसे अनदेखा करने की कोशिश की जाती है। 

मनोज ने कहा कि “मुझे इस बात के साथ शुरू करने दीजिए कि दुनिया निष्पक्ष नहीं है। मैं अपने 20 साल के अनुभव से कह रहा हूं कि हम इंडस्ट्री में औसत दर्जे का जश्न मनाते हैं। इंडस्ट्री छोड़िए, एक राष्ट्र के तौर पर भी हम औसत दर्जे का ही जश्न मनाते हैं। हमारी विचार प्रक्रिया, हमारे मूल्य प्रणाली में कहीं ना कहीं कमी हैं। जब हम प्रतिभा देखते हैं, तो हम तुरंत इसे अनदेखा करना चाहते हैं या फिर पीछे धकेलने की कोशिश करते हैं। यह हमारी मूल्य प्रणाली है जो कि काफी खेदजनक है”।बॉलीवुड की कई नामी-गिरामी हस्तियों पर नेपोटिज्म और खेमेबाज़ी के आरोप लगे हैं। उन्हें लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ा रहा है। इस मुद्दे पर भी मनोज ने अपने तर्क रखे हैं। मनोज का मानना है कि “लोगों को अब अपना व्यवहार बदलने की जरुरत है, वरना वह दर्शकों के दिलों में अपना सम्मान खो देंगे”।

इंटरव्यू के दौरान मनोज कहते हैं कि “मैने पहले भी कहा कि इस इंडस्ट्री में प्रतिभाओं को बर्बाद किया गया है। इंडस्ट्री में कई प्रतिभाशाली लोग हैं, जिन्हें उनकी सही जगह नहीं दी जा रही है”। वह आगे कहते हैं कि “अगर आपके पास प्रतिभा नहीं है, और फिर भी आपको यहां जगह मिल गई है, तो आपको खुद को बेहद भाग्यशाली मानना चाहिए। यह वही प्रणाली है जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूं। इस इंडस्ट्री का यह बेहद ठंडा रव्वैया है। मैं किसी पर इल्ज़ाम नहीं लगा रहा हूं। मैं इस इंडस्ट्री का एक हिस्सा हूं। यही कारण है कि मैने अपने कई इंटरव्यूज़ में कहा है कि हमें भीतर की ओर देखना होगा, उसे ठीक करना होगा। और अगर अभी आप ऐसा नहीं करते हैं, तो फिर दर्शकों के दिलों में आप अपना सम्मान खो देंगे”। 

मनोज बाजपेयी उन कलाकारों में से हैं, जिन्होने इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए लम्बी स्ट्रग्ल की है। 

उनकी कहानी भी सुशांत सिंह राजपूत की स्ट्रग्ल से कुछ ज्यादा अलग नहीं है। मनोज बाजपेयी सुशांत के साथ फिल्म ‘सोनचिड़िया’ में काम भी कर चुके हैं।बिहार में जन्में मनोज बाजपेयी जब बॉलीवुड में करियर बनाने के लिए मुंबई आए, तब इंडस्ट्री ने बेहद मुश्किल से उन्हें स्वीकार किया। मनोज बाजपेयी कई बार इंडस्ट्री के इस चलन पर अपनी आवाज़ उठा चुके हैं।

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