Film Review -पानीपत की तीसरी लड़ाई पर भव्य फिल्म, मराठों के शौर्य की शानदार कहानी

By Neetu Dec. 6, 2019, 6:57 a.m. 1k

फिल्म - पानीपत 

कलाकार - अर्जुन कपूर, संजय दत्त, कृति सेनन, पद्मिनी कोल्हापुरे, मोहनीश बहल

डायरेक्टर - आशुतोष गोवारिकर 

समीक्षा - नीतू कुमार 

रेटिंग्स - 3 स्टार 

आशुतोष गोवारिकर Ashutosh Gowariker की इतिहास पर बहुत अच्छी पकड़ है। उनको ऐतिहासिक फिल्मों का मास्टर कह सकते हैं। लगान और जोधा अकबर जैसी लाजवाब फिल्में बना चुके गोवारिकर ने इस बार पानीपत की तीसरी लड़ाई पर भव्य फिल्म बनाई है। पानीपत  Panipat में गोवारिकर ने मराठा साम्राज्य की भव्यता, उत्तर से दक्षिण तक उनका प्रभुत्व, बहादुरी  बलिदान की कहानी कही है। पानीपत की तीसरी लड़ाई वो युद्ध है जिसने भारत के इतिहास को बदल दिया। आशुतोष गोवारिकर फिल्म के जरिए मराठों की वीरगाथा कहना चाहते थे और वह कामयाब रहे हैं। पानीपत panipat की तीसरी लड़ाई को उन्होंने फिल्मी पर्दे पर बख़ूबी उतारा है।

कहानी -सदाशिव राव भाऊ ( अर्जुन कपूर , Arjun Kapoor) वीर मराठा योद्धा है। चचेरे भाई नाना साहब पेशवा (  मोहनीश  बहल) उनपर बहुत भरोसा करते हैं। उदयगिरी के निज़ाम को युद्ध में हराने के बाद उनका प्रभुत्व बढ़ जाता है। सदाशिव राव के बढ़ते रसूख से नाना साहब की पत्नी गोपिका बाई ( पद्मिनी कोल्हापुरे ) को अपने बेटे विश्वास राव ( अभिषेक निगम) की चिंता सताने लगती है। पत्नी के कहने में आकर नाना साहब सदाशिव राव को धनमंत्री बना देते हैं। इसी दौरान सदाशिव राव से वैद्य पार्वती बाई ( कृति सैनन) प्यार करने लगती है। सदाशिव राव भी धीरे धीरे प्यार में पड़ जाते हैं और फिर उनकी शादी हो जाती है। इसी दौरान मराठों के बढ़ते प्रभुत्व से डर कर नजीब उद्दौला अहमद शाह अब्दाली ( संजय दत्त , Sanjay Dutt ) को दिल्ली पर आक्रमण करने का न्योता देता है। एक लाख सैनिकों के साथ वो भारत आता है और नाना साहब उसे रोकने की जिम्मेदारी सदाशिव राव को देते हैं। सदाशिव राव सिर्फ 40 हजार सैनिकों को लेकर पुणे से दिल्ली रवाना होता है। कई राजाओं से मदद मांगी लेकिन दूसरे राज्यों से उतनी मदद मिली नहीं। 14 जनवरी 1961 को मराठों और अहमद शाह अब्दाली के बीच युद्ध हुआ। मराठे बहुत वीरता से लड़े लेकिन सेना कम होने और रसद ख़त्म हो जाने की वजह से मराठों की हार हुई थी। 

सदाशिव राव बहुत बहादुरी से लड़े लेकिन युद्ध में वीरगति मिली।

हमारी राय - आशुतोष गोवारिकर अपनी फिल्म के जरिए जो कहना चाहते थे उसमें वह कामयाब रहे हैं। पानीपत भव्य और शानदार फिल्म है। अर्जुन कपूर ने फिल्म के लिए जो मेहनत की है वो पर्दे पर साफ नजर आती है। युद्ध वाले सीन्स में वह गजब दिखे। वहीं कृति सेनन के साथ वाले रोमांटिक दृश्यों में भी पसंद आए। कृति सेनन का काम भी अच्छा है। उनका रोल अच्छा खासा है। अहमद शाह अब्दाली के रोल में संजय दत्त बहुत जंचे हैं। उनको देखकर लगता है की अहमद शाह अब्दाली ऐसा ही रहा होगा।

फिल्म के सेट्स कमाल के हैं। कॉस्ट्यूम्स भी ध्यान खींचते हैं। फिल्म का सेकंड हाफ आपको बांध कर रखता है।

आपको ऐतिहासिक फ़िल्में पसंद हैं तो जरूर देखिए पानीपत। हमारी तरफ से फिल्म को 3 स्टार। 

 

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