पुलिस ने सुशांत के 3 मनोचिकित्सकों से की पूछताछ, बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित होने की बात सामने आई

By Neetu July 21, 2020, 3:34 p.m. 1k

दीपक दुबे - सुशान्त सिंह राजपूत केस में मुबई पुलिस अब तक 36 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी हैं। वहीं सुशांत के मनोचिकित्सक केरसी छाबड़ा के भी बयान दर्ज हुए हैं। मुम्बई पुलिस के मुताबिक सुशान्त के इस केस के लिए डॉक्टरों के बयान काफी अहम है जिससे कि इस केस की कड़ियों को जोड़ने में काफी मदद मिलेगी। पुलिस ने अब इस मामले में उनके तीन और डॉक्टरों से पूछताछ किए हैं। पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए हैं।

बांद्रा पुलिस ने सुशान्त सिंह से जुड़े तीन pyschiatrist और एक psychotherapist का बयान इस मामले में दर्ज किया जिन्होंने सुशान्त का इलाज किया था। इसमें से एक मनोचिकित्सक ने पुलिस को अपने बयान में बताया है कि सुशान्त Bipolar disorder बीमारी से जूझ रहे थे जबकि बाकी मनोचिकित्सकों ने बताया कि डीप डिप्रेशन में थे लेकिन इनमें से किसी ने यह नहीं बताया कि सुशान्त के डिप्रेशन की आखिर वजह क्या थी। मुम्बई पुलिस को दिए गए डॉक्टरों के बयान के मुताबिक सुशान्त को दी जाने वाली दवा निर्धारित समय पर नहीं ले रहे थे। यहां तक कि सुशान्त इस दौरान अपने डॉक्टर्स को भी बदलते रहे। उन्हें किसी एक डॉक्टर पर भरोसा नहीं था। 

मुम्बई पुलिस के अनुसार  एक्टर सुशान्त सिंह राजपूत ने नम्बर 2019 से तीन psychiatrist से अपनी अवस्था को लेकर बातचीत की व परामर्श किया।  डॉक्टर्स के मुताबिक सुशांत सिंह को अपना इलाज करने वाले डॉक्टर्स पर भी विश्वास नहीं था, शायद यही वजह थी कि वो हर डॉक्टर से ज्यादा से ज्यादा 2 या 3 बार मिलते थे और फिर डॉक्टर बदल दिया करते थे। सुशांत सिंह का इलाज कर रहे लगभग सभी डॉक्टर्स के मुताबिक वो दवाइयां भी ठीक वक्त या ज्यादा वक्त तक नहीं लेते थे। आखिरी बार उन्होंने जिस डॉक्टर से अपना इलाज करवाया वो उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर का ट्रीटमेंट दे रहे थे.  सुशान्त ने आखिरी बार एक सीनियर मनोचिकित्सक से इलाज करवाया और उन्होंने उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar disorder) की बीमारी बताई थी। गौरतलब है कि विज्ञान(साइंस) की भाषा में "Bipolar disorder" एक ऐसी मानसिक बीमारी होती है जिसमे मरीज के व्यवहार में बहुत तेज़ी से बहुत बड़े बदलाव आते है। इसे manic depression भी कहा जाता है। इसमे मरीज के मन मे भावनात्मक रूप से बहुत तेज़ी के साथ उथल पुथल होती है। सुशान्त ने आखिरी बार जिस अपने डॉक्टर से इलाज करवाया वो उन्हें Bipolar disorder का ट्रीटमेंट दे रहे थे।  

केस की जांच कर रही मुम्बई पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया और कुछ लेखों मे सुशान्त के बारे में रिपोर्ट व अन्य माध्यम से कहा जा रहा है कि वो "पैरानोइया पर्सनैलिटी डिसऑर्डर" यानी पीपीडी  बीमारी से पीड़ित थे, अब तक पुलिस को जीतने डॉक्टरों ने बयान दिया है उसमें ऐसा कहीं भी नहीं आया है कि सुशान्त पर्सनालिटी डिसऑर्डर" "PPD" से पीड़ित थे। 

कोरोना के बढ़ते  संकट व बढ़ते आकड़ो के चलते लॉक डाउन की वजह से अप्रैल के बाद सुशांत सिंह ने डॉक्टर के पास जाने के बजाय फ़ोन पर ही सलाह लेनी शुरू कर दी थी । मुम्बई पुलिस को दिए डॉक्टर के बयान के मुताबिक लगता है कि पिछले 2 से 3 महीनों के दौरान सुशांत ने अपनी दवाईयां लेना भी बंद कर दी थी और साथ ही डॉक्टर के द्वारा उनके लिए दी जाने वाली सलाह का भी वह पालन नही कर रहे थे।

सुशान्त ने नवम्बर 2019 में एक ब्रिटिश नागरिक "डॉक्टर" से भी अपने इलाज को लेकर मशवरा लिया था । वो डॉक्टर मुम्बई में ही प्रैक्टिस करते हैं । सूत्रों के मुताबिक 2 या तीन सेशन सुशान्त ने उनके साथ लिए थे। 

मुम्बई पुलिस ने सुशान्त की निजी व प्रोफेशनल जिंदगी व उनकी बीमारी की वजह सभी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश में जुटी हुई है जिससे एक निष्कर्ष पर निकला जा सके कि सुशान्त कि आत्महत्या की असल वजह क्या थी। 

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