Film Review - छपाक की रूह हैं दीपिका, स्ट्रॉन्ग मैसेज के साथ भावुक कर देने वाली फिल्म

By Neetu Jan. 9, 2020, 8:56 p.m. 1k

फिल्म - छपाक

कलाकार - दीपिका पादुकोण,  विक्रांत मैसी, मधुरजीत सरगी,  अंकित बिष्ट 

डायरेक्टर - मेघना गुलजार

समीक्षा - नीतू कुमार

रेटिंग्स - 4 स्टार 

एक छपाक और जिंदगी बर्बाद । एसिड अटैक से पीड़ित लड़कियों का कुछ ऐसा ही दर्द होता है। एक खूबसूरत चेहरा अतीत बन जाता है और फिर पीड़ित अपने ही चेहरे को देखने से डरने लगती है। समाज में सहज जिंदगी नहीं जी पाती है लेकिन दीपिका पादुकोण Deepika Padukone की फिल्म Chhapaak देखकर आपको एसिड अटैक से पीड़ित लड़कियों पर दया नहीं आएगी बल्कि उनकी जीत पर आप खुशी महसूस करते हैं। 

कहानी - फिल्म शुरू होती है साल 2012 में हुए रेप निर्भया रेप और हत्या कांड के विरोध प्रदर्शन से और वही से फिर मालती (दीपिका पादुकोण)  की कहानी सामने आती है। एक पत्रकार एसिड अटैक सरवाइवर मालती को ढूंढती है। एसिड अटैक की त्रासदी झेल चुकी मालती बेरोजगार है उसे एक नौकरी की तलाश है घर में बीमार भाई है पिता का निधन हो चुका है और अकेली मां है। मालती को अपना परिवार संभालना है उसी दौरान मालती की मुलाकात अमोल विक्रांत मैसी से होती है। अमोल एसिड पीड़ित लड़कियों की मदद करता है और और छाया नाम से एक एनजीओ चलाता है। मालती दिवस एनजीओ से जुड़ जाती है और ऐसी पीड़ित को हर संभव मदद देती है। इसी दौरानी कैसी पीड़िता की पीड़ा देख मालती को अपनी कहानी याद आती है । कैसे एसिड के छपाक ने उसकी जिंदगी को नर्क बना दिया ? मालती जब 19 साल की थी तो पड़ोस के दर्जी बशीर खान की उस पर बुरी नजर पड़ गई थी। मालती जब अपने बॉयफ्रेंड राजेश  के  साथ  स्कूल से आ रही होती है बशीर खान देख लेता है। उसे देख बशीर खान जलता था। बशीर खान चाहता था कि मालती उससे शादी कर ले लेकिन मालती पढ़ना चाहती थी । वह सिंगर बनना चाहती थी और उसके सपने बड़े थे। एकतरफा प्यार में असफल बशीर खान मालती के चेहरे पर तेजाब फेंक देता है। इसके बाद मालती और उसके परिवार के लिए लंबा संघर्ष शुरू होता है। मालती को इंसाफ दिलाने में उसकी वकील अर्चना (मधुर जीत सरगी ) काफी मदद करती है। अदालत बशीर खान को 10 साल की सजा सुनाती है। यही सजा ऊपरी अदालत में भी बरकरार रहती है। एसिड की खुली बिक्री पर रोक लगाने के केस को भी मालती जीतती है। अदालत सरकार को एसिड की खुली बिक्री पर भी रोक लगाने का निर्देश को देती है। मालती को अपनी जिंदगी में एक बड़ी जीत मिलती है साथ ही अमोल का प्यार भी मिलता है।

खासियत - छपाक फिल्म की आत्मा दीपिका हैं और मालती के रोल में वह आपके दिल को छूती हैं। कई सीन्स में दीपिका आपको भावुक कर देती हैं। मालती के दर्द को,  खुशी को, उसकी जीत को उन्होंने बहुत ही खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है। 

विक्रांत मैसी का काम भी प्रभावित करता है। फिल्म में उनका अच्छा खासा रोल है। मेघना गुलजार ने छपाक को बहुत दिल से बनाया है और यह फिल्म देखने पर महसूस भी होता है। एक एसिड अटैक सर्वाइवर की कहानी आपको पूरी तरह से बांधकर रखती है। फिल्म कहीं भी उबाऊ नहीं लगती। फिल्म के डायलॉग असर छोड़ते हैं। छपाक का टाइटल सॉन्ग भी बेहतरीन है। गाने को गुलजार ने लिखा है और एक एक शब्द सीधे दिल में उतरते हैं।

Related Story