सुभाष घई ने दी भारत के अमीर मंदिरों को दी सोना दान करने की सलाह।

By Neetu May 15, 2020, 4:40 p.m. 1k

पूजा राजपूत- कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 24 मार्च से सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन लगा हुआ है। इस लॉकडाउन की वजह से भारत की स्थिति चीन, अमेरिका, इटली और स्पेन जैसी खराब हालत में तो नहीं पहुंची, लेकिन अर्थव्यवस्था का चक्का पिछले 53 दिन से पूरी तरह से जाम पड़ा है। तमाम उद्योगों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा है। जिसका सीधा असर देश की आम जनता पर पड़ रहा है। देश के गरीब और ज़रुरतमंद लोगों की मदद के लिए तमाम बॉलीवुड सितारे आगे आए हैं। अलग-अलग तरीकों से लोगों की मदद की जा रही है। 

ऐसे में अब मशहूर फिल्म डायरेक्टर सुभाष घई ने देश के अमीर मंदिरों से लोगों की मदद के लिए आगे आने और अपने खजाने में बंद पड़े सोने को दान करने की अपील की है। हाल ही में, सुभाष घई ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट किया और पूछा कि ‘क्या ये हमारे देश के सभी अमीर मंदिरों के लिए आगे आने का सही समय नहीं है? सोने के विशाल भंडार वाले सभी मंदिरों को सरकार के सामने सरेंडर करके अपना 90 प्रतिशत सोना सरकार को दान देना चाहिए, ताकि मुश्किल के इस वक्त में गरीब लोगों की मदद की जा सके,क्योंकि भगवान के नाम पर ये उन्होने लोगों से ही पाया है।‘

हाल ही में, सुभाष घई ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट किया और पूछा कि ‘क्या ये हमारे देश के सभी अमीर मंदिरों के लिए आगे आने का सही समय नहीं है? सोने के विशाल भंडार वाले सभी मंदिरों को सरकार के सामने सरेंडर करके अपना 90 प्रतिशत सोना सरकार को दान देना चाहिए, ताकि मुश्किल के इस वक्त में गरीब लोगों की मदद की जा सके,क्योंकि भगवान के नाम पर ये उन्होने लोगों से ही पाया है।‘

सुभाष घई के इस ट्वीट को जहां कई लोगों का समर्थन मिला तो वहीं कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल करना भी शुरु कर दिया। सुभाष घई के ट्वीट पर कमेंट करते हुए कुछ यूज़र्स ने बॉलीवुड स्टार्स और फिल्म निर्माताओं से ही अपनी 90 प्रतिशत सम्पति दान करने की बात कह दी।

हांलाकि बाद में सुभाष घई ने इस पूरे मामले पर एक और ट्वीट कर सफाई दी और कहा कि ‘कृप्या ध्यान दें। कोविड 19 के मुश्किल वक्त में भारत सरकार की मदद करने के लिए अमीर मंदिरों को सोना दान करने के लिए दी गई सलाह, पूरी तरह से मेरी व्यक्तिगत राय है, भारत का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैने ऐसा कहा। किसी भी राजनीतिक पार्टी, या धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं है।‘

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