अभय देओल ने माना बॉलीवुड में गुटबाजी है, सुशांत की आत्महत्या ने बोलने पर मजबूर किया !

By Neetu June 24, 2020, 12:35 p.m. 1k

पूजा राजपूत-बॉलीवुड ( Bollywood ) अभिनेता अभय देओल ( Abhay Deol ) फिल्मी घराने से तालुक्क रखते हैं। बावजूद इसके वह बॉलीवुड कल्चर से दूर ही रहते हैं। मेनस्ट्रीम सिनेमा की चमध-धमक में खोने की बजाए अभय ने अपने लिए लीक से हटकर रास्ता चुना। अभय का नाम उन अभिनेताओं में आता है, जो इंडस्ट्री में अपनी बात बेझिझक खुलकर सामने रखते हैं। अभय देओल एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। वजह है, अभय के वो सोशल मीडियो पोस्ट जो उन्होने उस वक्त किए हैं, जब फिल्म इंडस्ट्री में ‘नेपोटिज्म’ ( Nepotism) और ‘खेमेबाज़ी’ का मुद्दा गर्माया हुआ है।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद ये रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि वह इंडस्ट्री में खेमेबाज़ी का शिकार हुए। उन्हें फिल्मों से हाथ धोना पड़ा, उनकी फिल्मों को जानबूझ कर लटकाया गया, रिलीज़ नहीं होने दिया गया। एक्टर अभय देओल ने इंडस्ट्री के कामकाज पर अभय ने अपनी राय रखी है।

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अभय इंडस्ट्री में किए जाने वाले ‘भेदभाव’ पर तीखा और कड़ा प्रहार कर रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से अभय देओल #makingwhatbollywouldnt के तहत अपनी बात रख रहे हैं। साथ में वह अपनी पिछली फिल्मों को उदाहरण भी रख रहे हैं। 

इतना ही नहीं अभय ने बॉलीवुड में दिए जाने वाले अवॉर्ड्स पर सवाल उठाए हैं। फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ का पोस्टर शेयर करते हुए अभय ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि “जिंदगी ना मिलेगी दोबारा 2011 में रिलीज़ हुई थी। आजकल इस टाइटल का मैं हर रोज़ जाप कर रहा हूं। साथ ही मैं ये भी उल्लेख करना चाहूंगा कि लगभग सभी अवॉर्ड फंक्शनस ने मुझे और फरहान को मेन लीड्स से डिमोट किया हमें ‘सपोर्टिंग एक्टर्स’ के रूप में नोमिनेट किया। जबकि ऋतिक रोशन और कटरीना कैफ को ‘मेन लीड अभिनेताओं’ के रूप में नोमिनेट किया गया था। तो इंडस्ट्री के अपने लॉजिक है”। इसके साथ ही अभय आगे लिखते हैं कि, “ऐसे कई गुप्त और खुले तरीके हैं जिनसे इंडस्ट्री में आपके खिलाफ लॉबी की जाती है। इस केस में यह काफी बेशर्मी भरा तरीका था। मैने बेशक पुरस्कारों का बहिष्कार किया, लेकिन फरहान इसके साथ ठीक थे”।

इतना ही नहीं, अपने एक इंटरव्यू में अभय देओल ने सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस पर भी अपनी राय दी है। अभय ने कहा कि वह सुशांत को व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानते थे, लेकिन वह सुशांत के करियर से रिलेट कर सकते हैं।अभय कहते हैं कि “सुशांत की आत्महत्या ने उन्हें बोलने के लिए मजबूर किया, लेकिन इससे पहले भी वह अपनी आवाज़ उठाते आए हैं। मुझे खेद के साथ कहना होगा कि हर किसी को जगाने में किसी की मृत्यु हो गई। वे ना केवल इंडस्ट्री के बाहर से बल्कि अंदर से भी बदलाव की मांग कर रहे हैं”। 

अपने इंटरव्यू में अभय ने इंडस्ट्री में चल रही खेमेबाजी के बारे में बात करते हुए कहा कि ये खेमेबाजी बॉलीवुड में कई दशकों से हैं, इसी वजह से किसी ने भी इसके खिलाफ बोलने या खड़े होने के बारे में नहीं सोचा”।अभय कहते हैं कि मैं यह इसलिए कह सकता हूं कि “मैं फिल्म परिवार में बढ़ा हुआ हूं, और मैने बच्चे के तौर पर इन सारे खेलों के बारे में सुना है और बतौर अभिनेता मैने खुद देखा भी है”। ज़ाहिर है, बॉलीवुड में मौजूद नेपोटिज्म और खेमेबाज़ी के खिलाफ अब एक के बाद एक सितारे खुलकर सामने आ रहे हैं। शायद यही बदलाव की शुरूआत है।

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