अब टीवी इंडस्ट्री में ‘चन्द्रुमुखी चौटाला’ ने उठाई आवाज़। कहा- स्टार किड्स को दोष गलत, सिस्टम में ही है खराबी ।

By Neetu June 25, 2020, 6:13 p.m. 1k

पूजा राजपूत –बॉलीवुड(Bollywood) में इनदिनों ‘नेपोटिज्म’(Nepotism) के नाम पर ज़बरदस्त बवाल मचा हुआ है। सुशांत सिंह राजपूत(Sushant Singh Rajput) की आत्महत्या(Suicide) के बाद ‘नेपोटिज्म’ को लेकर ऐसी बहस छिड़ी है कि इस आंधी की चपेट में फिल्म इंडस्ट्री के कई नामी-गिरामी सेलेब्स आ गए हैं। ‘नेपोटिज्म’ के मुद्दे पर सबसे ज्यादा फिल्म निर्माता करण जौहर और स्टार किड्स को आलोचना झेलनी पड़ रही है। फिल्म के बाद म्यूज़िक इंडस्ट्री का स्याहा चेहरा भी सबके सामने आ गया है। सोनू निगम और अदनान सामी जैसे सिंगर्स, तथाकथित ‘म्यूज़िक माफिया’(Music Mafia) पर नए और पुराने सिंगर्स, म्यूज़िक कम्पोजर्स, म्यूज़िक डायरेक्टर्स से काम छीनने का आरोप लगा चुके हैं। भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार और सोनू निगम के बीच तो सोशल मीडिया वॉर शुरु हो चुकी है।

और अब टीवी इंडस्ट्री(Television Industry) की बारी है। जी हां, हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के बाद अब टीवी इंडस्ट्री का स्याह चेहरा भी सामने आने लगा है।सीरियल्स की दुनिया में ‘चन्द्रुमुखी चौटाला’(Chandramukhi Chautala) के नाम से फेमस कविता कौशिक(Kavita Kaushik) ने टीवी इंडस्ट्री के कड़वे सच को सामने लाने की कोशिश की है।

कविता कौशिक का कहना है कि “इंडस्ट्री में सिर्फ नेपोटिज्म को ही दोष देना गलत है, असली समस्या तो कुछ और है, सही बुराइयों को पहचानें और आवाज़ उठाएं, स्टार किड्स को दोष देना गलत है”।‘इसके साथ ही कविता ने बताया कि कैसे उन्हें सीरियल ‘FIR’ के मेकर्स से धमकियां मिल रही है।हाल ही में कविता ने अपने ट्विटर अकाउंट से कुछ ट्वीट किए हैं। बैक टू बैक किए गए इन ट्वीट्स में कविता ने अपनी आप-बीती सुनाई है।

कविता ने पहले ट्वीट में लिखा कि “मुझे कल ही याद दिलाया गया कि अगर मैने कहीं भी हरियाणवी पुलिसवाली का रोल दोबारा करने की कोशिश की,तो मुझ पर केस कर दिया जाएगा। जबकि चैनल यह शो पांच साल पहले ही बंद कर चुका है, दर्शकों की भारी डिमांड के बाद भी इस शो को दोबारा शुरू नहीं किया गया। और आप मूवी माफिया की बात करते हैं। क्यूट”।

कविता अपने अगले ट्वीट में लिखती हैं कि “जब मैने उन्हें ये बताया कि मैं एक पंजाबी कॉमेडी फिल्म की प्लानिंग कर रही हूं जिसमें एक हरियाणवी महिला पुलिस अधिकारी और एक पंजाबी पुलिस अधिकारी की रोमांटिक स्टोरी दिखाई जाएगी तो उन्होने मुझे यह केस वाली बात याद दिलाई। जब मैने मेकर्स को कहा कि मराठी पुलिसवाली की बजाए हरियाणवी पुलिसवाली अधिकारी चन्द्रमुखी मेरा ही दिया हुआ आइडिया था तो उन्होने कहा कि ‘तुम्हें इसका पैसा दिया गया था’।“

कविता ने इसके बाद तीसरा ट्वीट किया और लिखा कि “सिर्फ ‘नेपोटिज्म’ इस लिस्ट में नहीं हैं, जिसका एक्टर को सामना करना पड़ता है। चैनल और प्रोड्यूसर्स रिपीट शोज़ से मिलने वाली रॉयल्टी, एक्टर्स और टेक्नीशियन द्वारा बनाए गए प्रोडक्टस के राइटस, सितारों को बदनाम करने की ताकत और कॉन्ट्रैक्ट के बनाए गए जाल को भी इंजॉए करते हैं। स्टार किड्स पर निशाना साधने की बजाए असली बुराई से लड़ें”।कविता कौशिक के लगाए गए इन इल्ज़ामों से साफ है कि टीवी इंडस्ट्री की हालत भी फिल्म इंडस्ट्री से कम अलग नहीं हैं। यहां भी कई परेशानियां है, जिनसे इंडस्ट्री में काम करने वाले हर शख्स को दो-चार होना पड़ता है।

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