जवान बेटे की चिता को मुखाग्नि देते वक्त फूट-फूट कर रोए दिए सुशांत के पिता।

By Neetu June 17, 2020, 12:03 a.m. 1k

पूजा राजपूत –उस पिता के कंधे टूट गए होंगे, जब उसने अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा दिया होगा। उस पिता की थड़कने अचानक रूकने लगी होंगी, जब उसने अपने 34 साल के हंसते-खिलखिलाते बेटे को पार्थिव शरीर में तब्दील हुए देखा होगा।जो बेटा इतिहास रचने की बात कहता था, अब वह खुद ही इतिहास का हिस्सा बन गया गया है। बॉलीवुड एक्टर(Bollywood Actor) सुशांत सिंह राजपूत(Sushant Singh Rajput) अब हमारे बीच नहीं रहे। वह अंनत सफर पर निकल गए हैं। सोमवा शाम साढ़े चार मुंबई(Mumbai) के विले पार्ले स्थित पवन हंस श्मशान घाट(Pawan Hans Crematorium) में सुशांत को पंचतत्व में विलीन कर दिया गया।

उनके पिता केके सिंह(KK Singh) ने अपने इकलौते बेटे की चिता को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। बेटे की देह को अग्नि के हवाले करते वक्त केके सिंह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। वह फूट-फूट कर रो दिए। लेकिन क्या करते, बेटा अब साथ छोड़कर जा चुका था। उसकी मृत देह को पंचतत्व में विलीन करना जरुरी था।

सुशांत के अंतिम संस्कार पर उस वक्त वहां जो भी शख्स मौजूद था, वो नज़ारा देख उसका कलेजा मुंह को आ गया होगा।

बरसते आसमान के नीचे फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के कई सितारे बॉलीवुड के हंसते और ज़िंदादिली सितारे को आखिरी विदाई देने पहुंचे। 

सुशांत के पंचतत्व में विलीन होने के बाद विवेक ओबरॉय(Vivek Oberoi) ने इंस्टाग्राम(Instagram) पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होने सुशांत के अंतिम संस्कार के दृश्य का दिल दहला देने वाला उल्लेख किया है। विवेक ने इंस्टाग्राम पर लिखा है कि “सुशांत के दाह-संस्कार में शामिल होना आज दिन दहला देने वाला था। मैं वास्तव में चाहता हूं, काश मैं उनके साथ अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा कर पाता और उनका दर्द कम कर पाता था”।

इसके साथ ही विवेक ने जवान बेटे को खो चुके मजबूर वृद्ध पिता, और भाई की आक्समिक मौत से टूटी चुकी बहनों का दर्द भी ब्यान किया है।विवेक ने बताया कि “आज जब मैने उनके पिता को उनकी चिता को अग्नि देता देखा, उनकी आंखों में जो दर्द था, वह असहनिय था। जब मैने उनकी बहनों को रोते हुए सुना जो गिड़गिड़ाते हुए उन्हें लौट आने को कह रही थीं, मैं व्यक्त नहीं सकता यह कितना दुखद था।“ज़रा सोचिए वह नज़ारा कितना दर्दनाक होगा, जब कांपते हाथों से पिता ने अपने उस बेटे की चिता को मुखाग्नि दी होगी, जिसे उन्होने हज़ारों मन्नतों के बाद पाया था। वो बहनें अपने भाई से लौट आने की गुज़ारिश कर रही थी। काश कोई चमत्कार होता और वो भाई अपनी बहनों के पास वापिस लौट आता। लेकिन सुशांत तो गए ही थे वापिस ना लौटकर आने के लिए।

सुशांत परिवार के इकलौते बेटे थे। उनकी मां ऊषा देवी ने मंदिर-मंदिर जाकर मन्नतें मांगी थी, तब जाकर उनके घर में सुशांत का जन्म हुआ। जिसका नाम उन्होने बेहद प्यार से ‘गुलशन’ रखा था।लेकिन मां का वह गुलशन अब उजड़ चुका है। बेटा अपनी मां के पास पहुंच गया है। और पीछे छोड़ गया है, टूट चुके पिता और तीन बहनों को।रिपोर्ट्स के अनुसार सुशांत की अस्थियों को उनके पैत्रिक निवास पटना ले जाया जाएगा। वहीं, पतित पावनी गंगा में सुशांत की अस्थियों को विसर्जित किया जाएगा। सुशांत की मां आशा देवी की अस्थियों को भी पटना में ही गंगा में प्रवाहित किया गया था।

बता दें, कि सुशांत ने अपने फ्लैट में रविवार सुबह फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उनके पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि सुशांत की मौत दम घुटने से हुई है। सुशांत कोई सुसाइड लैटर छोड़कर नहीं गए हैं, जिससे पता चल पाता था कि आखिर वो कौन सी वजह थी जिसके चलते उन्होने जिंदगी से यूं मुंह मोड़ लिया। 

उनका परिवार अब वो वजह जानना चाहता है, जिसकी वजह से उन्होने लाडला बेटा खो दिया। खुदकुशी करने से तीन दिन पहले ही सुशांत ने पिता से बात की थी, लेकिन ज़रा भी इशारा नहीं दिया था कि वो किस मानसिक परेशानी के दौर से गुज़र रहे हैं। केके सिंह तो बेटे की नवंबर में शादी होने का इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि बेटे को घोड़ी पर चढ़ता देखने की बजाए वह उसे अर्थी पर प्राणहीन लेटा देखेंगे।सुशांत सिंह राजपूत अब दुनिया से जा चुके हैं, उन्हें बस यही कहना चाहेंगे, सुशांत जहां हो बस खुश रहना। भगवान आपकी आत्मा को शांति दे।

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