‘सुशांत केस’ के लिए CBI जांच की मांग कर रहे शेखर सुमन ने कहा- मेरा बेटा अध्ययन भी खुदकुशी की बात करता था !

By Neetu June 27, 2020, 6:05 p.m. 1k

पूजा राजपूत – टेलीविज़न और बॉलीवुड अभिनेता शेखर सुमन(Shekhar Suman) उन सेलिब्रिटीज़ में से हैं, जो लगातार मांग कर रहे हैं, कि सुशांत सिंह राजपूत(Sushant Singh Rajput) के आत्महत्सा केस(Suicide Case) की जांच CBI(CBI Inquiry) द्वारा की जानी चाहिए। शेखर सुमन सुशांत को न्याय दिलवाने की जंग सोशल मीडिया(Social Media) के ज़रिए लड़ रहे हैं। इसके लिए उन्होने बकायदा एक फोरम (justiceforSushantforum) भी बनाया है। शेखर के बनाए फोरम पर सुशांत सिंह राजपूत के कई फैंस ट्वीट कर मांग CBI जांच की मांग तेज़ कर रहे हैं।

इसी बीच शेखर सुमन ने अपने बेटे अध्ययन सुमन(Adhyayan Suman) को लेकर भी कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शेखर के मुताबिक, एक पिता होने के नाते वह सुशांत के पिता का दर्द अच्छे से समझ सकते हैं, क्योंकि एक बार उनके बेटे अध्ययन ने भी डिप्रेशन(Depression) में खुदकुशी करने की बात कही थी। जिसके बाद वह और उनका परिवार अध्ययन को लेकर काफी डर गया था। सुशांत के खुदकुशी करने का बाद जिस तरह ये यह खबर बाहर आई है कि वह भी लंबे वक्त से डिप्रेशन का शिकार थे, इस सच ने शेखर सुमन के पुराने ज़ख्मों को एक बार फिर से ताज़ा कर दिया है। उनका डर लौट आया है।

अपने इंटरव्यू में शेखर सुमन कहते हैं, कि “सुशांत मेरे लिए बच्चे की तरह था। मैं उसके पिता का दर्द समझ सकता हूं। जिस डिप्रेशन से सुशांत गुजरे हैं, मेरा बेटा अध्ययन भी वैसी स्थिति से गुजर चुका है। उसे भी फिल्म इंडस्ट्री में रोकने की कोशिश की गई थी, इसलिए वह भी डिप्रेशन में चला गया था। एक बार अध्ययन ने बताया था कि उसके अंदर भी सुसाइड का ख्याल आया था”।

अध्ययन की इस बात के बाद शेखर सुमन काफी डर गए थे। और वह रात में उठ-उठ कर अध्ययन को देखा करते थे। इंटरव्यू के दौरान शेखर बताते हैं कि उनके परिवार ने बेहद मुश्किल से अध्ययन को इस डिप्रेशन से बाहर निकला। परिवार उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता था। और अध्ययन को सभी समझाते थे कि जिंदगी लड़ने का नाम है।

शेखर सुमन कहते हैं कि  “जब अध्ययन ने उन्हें खुदकुशी की बात कही, तो मैं हैरान रह गए। मैने उन्हें समझाया कि जिंदगी लड़ने का नाम है। इसके बाद मैं और मेरी फैमिली लगातार यह कोशिश करती थी कि अध्ययन बिल्कुल अकेले ना रहें, परिवार का कोई सदस्य हमेशा उनके साथ रहता था”।शेखर सुमन आगे कहते हैं “जब अध्ययन के कमरे से बहुत देर तक कोई आवाज नहीं आती थी, तो मुझे घबराहट हो जाती थी। मैं छुप-छुपकर उसके कमरे में देखता था कि वह ठीक है ना। सुबह 4 या 5 बजे कई बार मैंने उसका दरवाजा खोल कर देखा तो वह छत को टकटकी लगाए देख रहा होता था, तो मैं उससे कहा करता था कि, बेटा सो जाओ, क्या परेशानी है। हम सब तुम्हारे साथ हैं। उनके बारे में सोचो, जो तुमसे भी खराब स्थिति में हैं।

अपने उन दिनों को याद करते हुए शेखर सुमन आज भी काफी डर जाते हैं। वह सभी युवाओं को यही सलाह देते हैं कि दुनिया में बहुत से लोग स्ट्रगल कर रहे हैं। दुनिया में ऐसा कोई शख्स नहीं है जिसे कोई परेशानी ना हो। ऐसे में सभी को खुश रहना चाहिए। परिवार और दोस्तों का साथ जब तक आफके साथ है, आप हर बुरे दौर से निकल सकते हैं।

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