सिनेमा को बासु चटर्जी ने दी थी नई ज़ुबां, मिडिल क्लास फैमिली की कहानी कहती थीं उनकी फिल्में !

By Neetu June 4, 2020, 6:40 p.m. 1k

मिडिल क्लास हिंदुस्तान की कहानी सिनेमा के सिल्वर स्क्रीन पर लाने वाले बासू चटर्जी की उम्र 90 के थे और काफ़ी वक्त से बीमार चल रहे थे। इस उम्र में डायबिटीज़ और हाईबल्ड प्रेशर जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे बासु दा। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बासू दा के निधन पर शोक व्यक्त किया।

मिडिल क्लास बैकग्राउंड वाले बासु दा की फिल्में उनकी अपनी ज़िंदगी का आईना रहीं। बासु चटर्जी ने फिल्म छोटी सी बात,हमारी बहु अल्का,बातों-बातों में,पिया का घर,खट्टा-मीठा, चितचोर, शौकीन, मन पसंद, चमेली की शादीऔर रजनीगंधा – हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर मानी जाती है, जिसमें – कार्टूनिस्ट वाले अंदाज़ में ही बासु दा ने मिडिल क्लास की ज़िंदगी भी दिखाई, और उससे जुड़ी सिचुएशन कॉमेडी भी। 

अजमेर में जन्में और आगरा में पले-बढ़े बासू चटर्जी – उस वक्त आगरा के अकेले सिनेमाघर में लगी हर फिल्म देखते और मुंबई जाने का मौका ढूंढते...। एक मिलेट्री स्कूल में बासू दा को लाइब्रेरिन की नौकरी मिली, तो झटपट उन्होने बैग पैक किया और पिता की रेलवे नौकरी का फायदा उठाते हुए, बे-टिकट मुंबई पहुंच गए। 

लेकिन नौकरी, तो बासु दा करनी नहीं थी, वो ब्लिट्ज़ मैगज़ीन के साथ बतौर कार्टूनिस्ट जुड़ गए और ये नौकरी उन्होने पूरे 18 साल तक की....। इस दौरान गीतकार – शैलेन्द्र से उसकी दोस्ती हुई, जो बासु भट्टाचार्य की फिल्म तीसरी कसम में काम कर रहे थे.। बासु चटर्जी ने शैलेन्द्र की सिफ़ारिश पर – तीसरी कसम में असिस्टेंट डायरेक्टर ज्वाइन कर लिया.और इसके बाद गोविंद सरैया की फिल्म सरस्वती चंद्र में भी असिस्सटेंट का काम किया...। इस दौरान वो फिल्म सोसायटी मोमेंट ज्वाइन करके -–तमाम इंटरनेशनल फिल्में भी देखते रहें...। 

दो फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने के बाद बासू दा ने तय किया कि अब उन्हे फिल्म बनानी है। पैसा जेब में था नहीं, तो उन्होने उन्होने फिल्म फाइनेंस कॉरपोरेशन में लोन के लिए अप्लाई किया, जो कुछ अलग तरह की फिल्म चाहते थे। 1969 में इस लोन के सहारे उन्होने अपनी फिल्म सारा आकाश बनाई, जिसके लिए उन्हे बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला। इस फिल्म के लिए लिया गया लोन – बासू दा ने 7 साल बाद चितचोर के साथ उतारा...। 

सारा आकाश को तारीफ़ें तो मिली... लेकिन बासू चटर्जी इंडस्ट्री में जमे – पिया का घर और रजनीगंधा से। उस दौर के बड़े-बड़े स्टार भी बासू चटर्जी की फिल्म में आम लोंगों की ज़िंदगी जीते। पिया का घर में – उस वक्त की सुपरस्टार एक्ट्रेस – जया बच्चन थीं, तो रनजीगंधा में अमोल पालेकर और विद्या सिन्हा....। अमोल और विद्या की जोड़ी को छोटी सी बात में भी दोबारा लिया...और ये फिल्म भी बेहद कामयाब हुई। 

बोरिवली में 17 रूपए किराए के मकान में रहकर – सिनेमा के महल बनाने वाले बासु चटर्जी – चर्चगेट तक बस और ट्रेन से जाते... और बचपन से लेकर जवानी तक – लोअर मिडिल क्लास फैमिली के बीच रहते – उन्ही से अपनी कहानियां निकालते। 

90 साल के बासू चटर्जी ने 42 हिंदी और तकरीबन 10 बांग्ला फिल्में बनाई... । और हर फिल्म – छोटे बजट की, जो ब्लॉकबस्टर तो नहीं कहलाती थी, लेकिन दिल छू जाती थी। 

70 के दशक में जब एंग्री यंग मैन का जादू हर तरफ आया था उस दौर में बसु ने कुछ ऐसी फिल्में की थीं जिन्होंने हर एक आम आदमी को उनकी फिल्मों से जोड़ा... बसु ने उस दौर के सभी बड़े कलाकारों के साथ काम किया....बिग बी के साथ मंजिल बनाई, चक्रव्यू में राजेश खन्ना को कास्ट किया... शौकीन में मिथुन चक्रवर्ती तो मनपसंद में देवानंद... बसु की फिल्म एक रुका हुआ फैसला – इंडियन सिनेमा का माइल स्टोन मानी जाती हैं। 

फिल्मों में बासु चटर्जी के योगदान के लिए 7 बार फिल्म फेयर अवॉर्ड और दुर्गा के लिए 1992 में नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला था... 2007 में उन्हें आईफा ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा था।...1969 से लेकर 2011 तक बासुदा फिल्मों के डॉयरेक्शन की लाइन में लगातार काम करते रहे थे..

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