Varun Dhawan Daughter Health: बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ के एक बेहद भावुक और चुनौतीपूर्ण अध्याय को साझा किया है. वरुण और उनकी पत्नी नताशा दलाल, जो जून 2024 में माता-पिता बने थे, अपनी नन्ही बेटी लारा की सेहत को लेकर काफी समय से संघर्ष कर रहे थे. वरुण ने एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि लारा एक दुर्लभ मेडिकल कंडीशन से जूझ रही थी, जिसके कारण उसके चलने की क्षमता पर असर पड़ सकता था.
क्या है 'डेवलपमेंटल डिस्प्लेजिया ऑफ द हिप' (DDH)?
वरुण ने बताया कि लारा को DDH नाम की बीमारी का पता चला था. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे के कूल्हे का जोड़ (Hip Joint) ठीक से विकसित नहीं हो पाता, जिससे कूल्हा अपने सॉकेट से खिसक जाता है. अगर समय पर इसका पता न चले, तो भविष्य में बच्चे के पैरों की लंबाई में अंतर आ सकता है और उसे चलने-दौड़ने में भारी दिक्कत हो सकती है.
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ढाई महीने तक 'स्पाइका कास्ट' का दर्द
इलाज की प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए वरुण काफी भावुक दिखे. उन्होंने बताया कि लारा को करीब ढाई महीने तक 'स्पाइका कास्ट' (एक विशेष प्रकार का भारी प्लास्टर) में रहना पड़ा. यह कास्ट कूल्हे और पैरों को स्थिर रखने के लिए लगाया जाता है. वरुण के लिए वह दौर सबसे कठिन था जब छोटी सी जान को एनेस्थीसिया देकर इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा.
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बिना सर्जरी के सफल हुआ उपचार
राहत की बात यह है कि लारा को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी. वरुण ने जानकारी दी कि डॉक्टरों ने एक विशेष मेडिकल प्रोसीजर के जरिए कूल्हे की इस समस्या को ठीक कर दिया है. अब लारा का कास्ट हटा दिया गया है और वह धीरे-धीरे रिकवर (ठीक) हो रही हैं. एक्टर ने डॉक्टरों का आभार जताते हुए कहा कि सही समय पर जांच होने से उनकी बेटी का भविष्य सुरक्षित हो गया.
जागरूकता के लिए लिखेंगे किताब
वरुण धवन इस अनुभव को केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहते. उन्होंने बताया कि वे इस पूरी यात्रा और DDH की बीमारी पर विस्तार से एक किताब लिखने के बारे में सोच रहे हैं. उनका मानना है कि भारत में इस बीमारी को लेकर जानकारी बहुत कम है, और एक किताब के जरिए वे अन्य माता-पिता को इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकेंगे.
"सहानुभूति नहीं, सतर्कता चाहिए"
वरुण ने साफ किया कि उन्होंने इस बीमारी का खुलासा किसी की सहानुभूति पाने के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए किया है. उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों की शारीरिक हरकतों पर बारीकी से नजर रखें. अगर बच्चे के चलने के तरीके में या पैरों के संतुलन में जरा भी असामान्यता दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि शुरुआती दौर में इसका इलाज पूरी तरह संभव है.