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Rekha अपने पिता के अंतिम संस्कार में क्यों शामिल नहीं हुई थी, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

बॉलीवुड एक्ट्रेस रेखा का बचपन बेहद मुश्किलों में बीता और उन्हें अपने पिता से सपोर्ट नहीं मिला. हालांकि उन्होंने बॉलीवुड में जगह बनाई. लेकिन जब उनके पिता का निधन हुआ तो वह उनके अंतिम संस्कार पर नहीं पहुंची थी और इसपर उन्होंने कहा था कि वह शोक क्यों करें. तो चलिए जानते हैं उन्होंने ऐसा क्यों कहा.

Rekha

रेखा बॉलीवुड की बेहतरीन एक्ट्रेस रह चुकी है. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में तमाम शानदार फिल्में की हैं और लंबे समय तक इंडस्ट्री पर राज किया है. साथ ही वह आज भी दर्शकों के बीच काफी पॉपुलर हैं. एक्ट्रेस आज भी सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं. एक्ट्रेस सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं बल्कि अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी खूब चर्चा में रही हैं. हालांकि आज हम एक्ट्रेस और उनके पिता के रिश्ते के बारे में बात करेंगे. वहीं, एक्ट्रेस अपने पिता के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं गई थी, ये भी जानेंगे.

दरअसल, रेखा का पूरा नाम भानुरेखा गणेशन है. वह तमिल सुपरस्टार जेमिनी गणेशन और पुष्पावल्ली की बेटी हैं. रेखा की मां पुष्पावल्ली के साथ रिश्ता होने के बाद भी उनके पिता जेमिनी पहले से शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे भी थे. रेखा का बचपन काफी मुश्किलों भरा रहा और हमेशा ही उन्हें जेमिनी की नाजायज बेटी के रूप में बुलाया गया. हालांकि बाद में जब उन्होंने अपना करियर बनाया और तो अपनी एक अलग पहचान हासिल की.

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पिता के जाने के बाद कैसा महसूस करती थी रेखा

एक्ट्रेस छह भाई बहनों के बीच पली बढ़ी थी. वहीं उनके पिता के आठ बच्चे थे, जिसमें से पहली पत्नी से चार बच्चे, दो रेखा की मां पुष्पावल्ली से और दो सावित्री से थे. रेखा अपने पिता के बारे में बात करते हुए सिमी गरेवाल से कहती हैं, "जब वह घर छोड़कर गए थे तब मैं बहुत छोटी थी. मुझे वो याद तक नहीं है. पीछे मुड़कर देखने पर शायद मुझे उनकी कमी महसूस हुई हो, लेकिन तब तक आप किसी चीज का एक्सपीरियंस नहीं करते, तब तक आपको उसका मतलब नहीं पता होता. मुझे पिता शब्द का अर्थ ही नहीं पता था.

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रेखा का बचपन मुश्किलों भरा रहा

रेखा और उनकी सौतेली बहन एक ही स्कूल पढ़ा करती थीं और अक्सर ही उनके पिता उसे स्कूल छोड़ने जाते थे और रेखा अच्छे से जानती थीं कि जेमिनी गणेशन उनके पिता थे. इस दौरान सिमी ने इस पर कहा, "मुझे नहीं लगता कि उन्होंने मुझे कभी भी देखा होगा". एक्ट्रेस को महज 14 साल की उम्र में स्कूल से निकाल दिया था और इस कारण वह फिल्मों में काम करने को मजबूर हो गई थी. क्योंकि उनकी फैमिली में फाइनेंशियल मुश्किलें चल रही थीं. रेखा के लिए फिल्मों में आना भी काफी मुश्किलों से भरा रहा था. इसके बाद उन्होंने 1970 में सावन भादो से डेब्यू किया और दो प्यार, मिस्टर नटवरलाल, दो मुसाफिर, काली घटा, सिलसिला, जीवन धारा जैसी तमाम फिल्मों में काम किया और बॉलीवुड में सफलता हासिल की.

अपने पिता के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंची थी रेखा

फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद रेखा का कई बार अपने पिता से सामना हुआ. यहां तक कि एक बार उन्होंने उनके साथ स्टेज भी शेयर किया. वहीं, 2005 में जब जेमिनी गणेशन का निधन हुआ तो रेखा उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई. इंटरव्यू में रेखा ने कहा था, "मैं उनके लिए क्यों शोक करूं, जब वे मेरे इतने करीब हैं? मैं क्यों शोक करूं, मैं उनके गुणों, वैल्यूज, उनकी लाइफ और उनके अस्तित्व के लिए आभारी हूं? तो किस बात का शोक? मैं खुश हूं कि मुझे उनके साथ बुरा वक्त नहीं बिताना पड़ा. वे मेरी कल्पना में ही रहे और सच कहूं तो ये ज्यादा सुंदर है. मैं जिनसे भी प्यार करती हूं, वो इस संसार की सीमाओं से परे हैं.

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